Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

"पहचान हृदय के"

"पहचान हृदय के"

रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"
बुलंदी पर रही पहचान हृदय के,
मिलल जब प्रेम के वरदान हृदय के।


नज़र जब से नज़र से जा मिलल हे,
जागल तब से नया अरमान हृदय के।


ऊ हँस दे त सुरन के फूल झरिहें,
जगी तब प्रेम के मुस्कान हृदय के।


जब कभी भी दर्द दिल में होला,
तब बुलंदी पर देखी गान हृदय के।


जुदाई जब लिखल किस्मत में हमर,
ग़ज़ल बनके मिलल सम्मान हृदय के।


'राकेश' इश्क साँचो मन से करिहऽ,
तब बुलंदी पर देखी उड़ान हृदय के।

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ