"पहचान हृदय के"
रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"बुलंदी पर रही पहचान हृदय के,
मिलल जब प्रेम के वरदान हृदय के।
नज़र जब से नज़र से जा मिलल हे,
जागल तब से नया अरमान हृदय के।
ऊ हँस दे त सुरन के फूल झरिहें,
जगी तब प्रेम के मुस्कान हृदय के।
जब कभी भी दर्द दिल में होला,
तब बुलंदी पर देखी गान हृदय के।
जुदाई जब लिखल किस्मत में हमर,
ग़ज़ल बनके मिलल सम्मान हृदय के।
'राकेश' इश्क साँचो मन से करिहऽ,
तब बुलंदी पर देखी उड़ान हृदय के।
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