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जीबीएम कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. सीमा पटेल ने एमयू के कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केसरी से की भेंट

जीबीएम कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. सीमा पटेल ने एमयू के कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केसरी से की भेंट

  • महिला कॉलेजों में जीरो नामांकन फीस के कारण उत्पन्न गंभीर आर्थिक संकट से शीघ्र उनके अस्तित्व पर हो सकता है खतरा, कुलपति को कराया अवगत
गया। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल और किशोरी सिन्हा महिला महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्या डॉ गायत्री सिंह ने मगध विश्वविद्यालय बोधगया के कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर दिलीप कुमार केसरी से कुलपति कार्यालय जाकर भेंट की। उन्होंने कुलपति को महिला कॉलेज में जीरो फीस के आधार पर नामांकन लेने के कारण उत्पन्न गंभीर आर्थिक संकट से अवगत कराया। इस संबंध में दोनों प्रधानाचार्यों ने कुलपति महोदय को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि को-एजुकेशन कॉलेजों को छात्रों के माध्यम से कुछ नामांकन फीस प्राप्त हो जाती है, लेकिन महिला कॉलेजों में केवल छात्राओं का ही नामांकन होता है। इन महाविद्यालयों में छात्रा शुल्क के अतिरिक्त आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है। कॉलेज में आंतरिक परीक्षा का संचालन, एनएसएस एवं एनसीसी इकाइयों का संचालन, खेल कूद, विभिन्न अवसरों पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों, बिजली, स्वच्छ पेयजल सुविधा, टेलीफोन, इंटरनेट, सीसीटीवी कैमरा, साफ-सफाई, स्टेशनरी एवं सुरक्षा गार्ड आदि पर होने वाले खर्च के लिए आय का कोई भी स्रोत नहीं है। जीरो नामांकन फीस पर नामांकन लेने के कारण कॉलेज में उत्पन्न वित्तीय संकट के फलस्वरूप शैक्षणिक तथा सह-शैक्षणिक सभी गतिविधियों के रुक जाने की संभावना है।
प्रधानाचार्या डॉ पटेल ने कुलपति को बतलाया कि क्षतिपूर्ति की राशि सरकार द्वारा 10 वर्षों के पश्चात केवल एक सत्र के लिए काफी कम मात्रा में दी गई है, और गौतम बुद्ध महिला महाविद्यालय का अभी भी लगभग सवा दो करोड़ सरकार से बकाया है। ज्ञातव्य है कि बिहार सरकार के 2015 के संकल्प में जिसमें छात्राओं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति की छात्र-छात्राओं से नामांकन के समय निशुल्क प्रवेश लेना है। उसी संकल्प का दूसरा भाग राज्य सरकार द्वारा ऐसे प्रत्येक संस्था को प्रति वर्ष प्रति छात्र क्षतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है, जिसका अनुपालन नहीं हुआ। इसका परिणाम यह है कि महाविद्यालय भुखमरी के कगार पर है और किसी प्रकार का विकास कार्य या छात्र हित में मौलिक संरचनाएं जैसे कैंटीन, पालना घर( क्रैश), कॉमन रूम, सेनिटरी वैंडिंग व डिस्पोजल मशीन, बीसीए लैब हेतु कंप्यूटर व प्रिंटर, पर्याप्त वर्ग कक्ष, विषयों के विभाग जैसी मूलभूत व्यवस्थाएँ चाहते हुए भी उपलब्ध कराने में महाविद्यालय असमर्थ है। 2023 के बदले हुए सिलेबस के अनुरूप पुस्तकालय में पुस्तकें तक नहीं खरीद पा रहे हैं। इसी कारण मगध विश्वविद्यालय के अधिकांश महाविद्यालय 10 साल से NAAC ग्रेडिंग प्रक्रिया को अपनाने में असमर्थ रहे हैं, जिससे उनकी यूजीसी की मान्यता रद्द होने का डर बना हुआ है। यदि बिहार सरकार अपने संकल्प के अनुसार प्रत्येक वर्ष क्षतिपूर्ति देती रहती, तो न तो महाविद्यालयों की ये दुर्गति होती और न ही छात्राओं से शुल्क लेने की नौबत आती।
ये भी गौर करने की बात है कि 2023 में 4 वर्षीय सीबीसीएस सेमेस्टर प्रणाली के आरम्भ में लोकभवन कार्यालय से जारी ऑर्डिनेंस में महाविद्यालय संचालन हेतु उपरोक्त सभी मद में शुल्क संरचना स्पष्ट निर्धारित है और उसमें स्पष्ट निर्देश है कि बिहार में इसके पूर्व के सभी आदेश निरस्त किए जाते है, परंतु शुल्क संबंधित निर्देश को पूर्णतः नजरअंदाज करते हुए लोकभवन के आदेश की अवहेलना की जा रही है। अतः प्रधानाचार्या ने कुलपति से इस स्थिति में वैकल्पिक तौर पर महिला कॉलेजों के अस्तित्व पर छाये संकट को सहानुभूति से विचार करते हुए छात्राओं से आंशिक नामांकन फीस लिए जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया, क्योंकि यदि पुरानी संस्थाएं जीवित रहेंगी तभी छात्राएं उसमें पढ़ पाएंगी। साथ ही बिहार सरकार से जो पूर्व की बकाया राशि है, उसको महाविद्यालयों को तत्काल उपलब्ध करवाने हेतु उचित कार्यवाही करने की मांग की।
गौतम बुद्ध महिला कॉलेज की जन संपर्क अधिकारी डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने बतलाया कि प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल ने श्री किशोरी सिन्हा महिला महाविद्यालय, औरंगाबाद की प्रधानाचार्या डॉ गायत्री सिंह एवं राजेंद्र मेमोरियल वीमेंस कॉलेज, नवादा के प्रधानाचार्य डॉ विनोद कुमार के साथ मिलकर कुलपति प्रो. केसरी के माध्यम से बिहार के राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और शिक्षा मंत्री को भी महिला कॉलेजों में जीरो फीस से नामांकन लेने से उत्पन्न हुई वित्तीय संकट की स्थिति से अवगत कराता एक अनुरोध पत्र सौंपा है, जिसमें वीमेंस कॉलेजों में जीरो नामांकन फीस लेने के निर्णय से उत्पन्न वित्तीय समस्याओं के संबंध में कुलाधिपति से आवश्यक सहयोग एवं दिशानिर्देश के लिए गुहार लगाई गई है। कुलपति प्रो. केसरी ने प्रधानाचार्या डॉ पटेल एवं डॉ सिंह को कुलाधिपति महोदय एवं बिहार के शिक्षा मंत्री के समक्ष विषय को रखने का आश्वासन दिया। प्रो. केसरी ने वित्तीय संकट के कारण महिला महाविद्यालयों को चलाने में आ रही समस्याओं को गंभीरता से सुना, समझा, और यथोचित समाधान के लिए आश्वासन दिया। मौके पर छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) प्रमोद कुमार चौधरी, किशोरी सिन्हा महिला महाविद्यालय, औरंगाबाद की प्रधानाचार्या डॉ. गायत्री सिंह की भी उपस्थिति रही।

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