कैसे करूँ योग
नीता सहायकैसे करूँ मैं योग, जब काम का हो बोझ
कहते हैं सब लोग कि करो योग तो रहोगी निरोग,
रोज करो योग तो निकट ना आए कोई रोग,
सुबह हो या शाम, रोज करो योग,
पर कैसे करूँ मैं योग, जब काम का हो बोझ।
बेशक पहला सुख है निरोगी काया,
धन-दौलत तो है महज एक माया।
सुन-सुन कर ये ज्ञान की बातें,
मेरा मन भी बड़ा भरमाया।
तब मैंने भी ये ठाना, कि नियमित करुंगी मैं योग,
तब प्रवाहित होगा मेरे मन मे भी सुख-शांति
अपने ठहरे जीवन में मैं लाउँगी कुछ क्रान्ति।
अगले दिन आँखें खुलते ही योजनानुसार
मैंने अपनी स्पेशल चटाई बिछाई,
अभी पोजीशन ली ही थी कि एक आवाज आई,
क्यों, आज चाय-वाय नहीं मिलेगी क्या भाई ?
ओह, कह कर मैंने चाय का पानी चढ़ाया,
सबको चाय बांँट कर सोचा मैंने कि
चलो अनुलोम-विलोम का ही करूँ प्रयोग,
ताकि मेरे पास न फटके कोई रोग,
तभी याद आया मुझे कि अभी आने वाली है कामवाली (मेड),
उसके पहले मुझे करने हैं सारे बर्तन खाली,
वरना हो जायेगा सब कारज अपहेल्ड।
(ना, ना, सुधार कर पढ़ें 'हेल्ड अप')
लगे हाथों मैंने वाशिंग पाउडर को बाल्टी में घोला,
और गंदे कपड़ों को उसमें डुबो कर छोड़ा।
क्या करुँ अब मैं! पूछा दिल ने अपने-आप से,
करना क्या है, अब शाम को कर लेना योग - कहा ये दीमाग ने,
खाना न बनाओगी तो क्या खायेंगे घर के लोग,
चल झटपट बेसन का तैयार कर घोल,
जरूरी है पहले भोजन बनाना,
क्योंकि भूखे भजन न होये गोपाला।
मैंने कढ़ी बना कर बरी में डाला,
अरे नहीं, नहीं, उल्टा हो गया,
मैंने बरी बना कर कढ़ी में डाला..
रोटी, सब्जी, चावल, सलाद भी बनाया
और सारा काम निपटाया।
शाम तक फ्री होकर मैंने फिर
अपना योग वाला मैट बिछाया,
और सिलसिला जैसे ही शुरू हुआ,
कि तभी दरवाजे पर कोई चिचियाया,
मैं भाग कर बाहर आई तो पता चला,
कि मेरे छ वर्ष के बेटे को
पड़ोसी के कुत्ते ने डराया।
(शुक्रिया कुत्ते को कि वो काटा नहीं, सिर्फ डराया),
फिर मैंने उस प्यारे डाॅगी को बड़े प्यार से भगाया।
और तभी ऑफिस से जल्दी आ कर
मेरे पतिदेव ने भी खूब सरप्राइज दिखाया,
संग अपने कुछ इष्ट मित्रों को भी उन्होंने लाया,
और हौले से हलवे के साथ पकौड़ों की फरमाइश फरमाया।
ओह, हो गया मेरा योग,
अरे पगली, हँसो, हँसो, कर लो हास्य योग
रहोगी खूश तो होगी तंदरुस्त न आये कोई रोग।
ये सोच कर मैंने चाय नाश्ता बनाया.
औरसबका तारीफभी पाया।
शुरू हो गई फिर से चक्की
घर-गृहस्थी के काम की,
योग तो छोड़ो, नहीं सोच सकते हम
कुछ पल आराम की,
चले थे बड़े अरमान से करने हम योग,
क्या पता था कि गृहणियों का
बड़ी मुश्किल से होता है योग से संयोग।
उनकी इम्युनिटी तो ऐसे ही होती है मजबूत,
योग हो या न हो, होता नहीं उन्हें कोई रोग।
प्रश्न रह गया - कैसे करे कोई योग, जब काम का हो बोझ!
पुनश्च: - क्या घर संँभालना भी नहीं है योग?
सोचें, सोचें, इस मुद्दे पर आप सब लोग।
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