शर्मिंदा हूँ
संजय जैनदेखो देखो लोग अब तुम
चोरो का मौसम आ गया।
महंगाई की मार ने फिर से
सबको लूटने को तैयार किया।
पढ़े लिखे भी फ्री घूम रहे
करने को कोई काम नही।
डिग्री लेकर दर-दर भटक रहे
फिर भी मिलता काम नही।
पैसा समय बर्बाद किया और
कर्जदार माँ बाप बन गये।
न हम मर सकते है और
न ही जीने के काबिल है।।
बिना पढ़े लिखे ही अच्छे रहते
माँ बाप कर्जदार तो न होते।
उनकी और खुदकी हालत
अब तो देखी भी नही जाती।
कितना परिश्रम किया उन्होंने
मुझको कुछ बनाने में।
पर मैं भी कोशिस कर-कर के
थक गया हूँ अपने प्रत्यनों से।।
पढ़ा लिखा लाचार यहाँ पर
किसको दोष दे हम इसका।
विकसित भारत की कल्पना वालों
कुछ तो उत्तर दो इसका।
या ये सब कहना सुनना
अब कम से कम बंद करो।
और कितना छलोगे तुम
इस भोली-भाली जनता को।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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