Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

शर्मिंदा हूँ

शर्मिंदा हूँ

संजय जैन

देखो देखो लोग अब तुम
चोरो का मौसम आ गया।
महंगाई की मार ने फिर से
सबको लूटने को तैयार किया।

पढ़े लिखे भी फ्री घूम रहे
करने को कोई काम नही।
डिग्री लेकर दर-दर भटक रहे
फिर भी मिलता काम नही।
पैसा समय बर्बाद किया और
कर्जदार माँ बाप बन गये।
न हम मर सकते है और
न ही जीने के काबिल है।।

बिना पढ़े लिखे ही अच्छे रहते
माँ बाप कर्जदार तो न होते।
उनकी और खुदकी हालत
अब तो देखी भी नही जाती।
कितना परिश्रम किया उन्होंने
मुझको कुछ बनाने में।
पर मैं भी कोशिस कर-कर के
थक गया हूँ अपने प्रत्यनों से।।

पढ़ा लिखा लाचार यहाँ पर
किसको दोष दे हम इसका।
विकसित भारत की कल्पना वालों
कुछ तो उत्तर दो इसका।
या ये सब कहना सुनना
अब कम से कम बंद करो।
और कितना छलोगे तुम
इस भोली-भाली जनता को।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ