मानव जीवन के तीन प्रमुख आधार हैं धर्म, अध्यात्म और योग : हृदय नारायण झा

- आध्यात्मिक आश्रम फाउंडेशन के स्थापना समारोह में योग, धर्म, अध्यात्म, तंत्र एवं ज्योतिष पर विस्तृत चर्चा
पटना, 27 जून 2026।
जमाल रोड स्थित शरण कम्पाउण्ड में आयोजित आध्यात्मिक आश्रम फाउंडेशन के द्विदिवसीय स्थापना समारोह के दूसरे दिन प्रातःकालीन सत्र में धर्म, अध्यात्म, योग, तंत्र एवं ज्योतिष विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, साधकों एवं योगाभ्यासियों ने भाग लिया। प्रातः छह बजे से आरम्भ हुए इस विशेष सत्र का संचालन फाउंडेशन द्वारा मनोनीत आचार्य एवं योग विशेषज्ञ पंडित हृदय नारायण झा ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीन बार पवित्र ‘ॐ’ के उच्चारण के साथ हुआ। इसके उपरांत आचार्य झा ने अष्टांग योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए योग साधना के मूल आधार यम और नियम की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, अनुशासित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने की एक समग्र पद्धति है।
उन्होंने उपस्थित साधकों को पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन तथा गुप्तासन जैसे स्थिरता प्रदान करने वाले आसनों का अभ्यास कराया। साथ ही रेचक, पूरक, नाड़ी शोधन, अंतःकुंभक, बाह्यकुंभक, अग्निसार क्रिया, त्रिबंध तथा योगमुद्रा आसन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। सत्र के दौरान आत्मध्यान एवं सूर्यकवच का सामूहिक पाठ कराया गया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।

धर्म, अध्यात्म और योग जीवन के तीन स्तंभ
अपने उद्बोधन में पंडित हृदय नारायण झा ने कहा कि धर्म, अध्यात्म और योग मानव जीवन के तीन प्रमुख अंग हैं। धर्म जीवन को सौंदर्य और मर्यादा प्रदान करता है, अध्यात्म मनुष्य को आंतरिक स्वतंत्रता और आत्मबोध की ओर ले जाता है, जबकि योग शरीर, मन और आत्मा को शक्ति एवं संतुलन प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप क्षमा, धैर्य, इन्द्रिय-निग्रह, सत्य, पवित्रता, संयम, विद्या, बुद्धि तथा क्रोध त्याग जैसे गुणों को धारण करने में निहित है। अध्यात्म का अर्थ शरीर और आत्मा के वास्तविक संबंध को समझना तथा आत्मसाक्षात्कार की दिशा में आगे बढ़ना है।
योग के लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से शरीर में शुद्धता, मजबूती, स्थिरता, धैर्य, हल्कापन तथा प्रत्यक्ष ज्ञान की अनुभूति होती है। योग व्यक्ति को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित बनाता है और सफलता प्राप्त करने की क्षमता को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए हर आयु वर्ग के स्त्री-पुरुषों के लिए अष्टांग योग अत्यंत उपयोगी है।
तंत्र और ज्योतिष को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प
इस अवसर पर फाउंडेशन के निदेशक, शक्ति उपासक, तांत्रिक एवं ज्योतिषाचार्य पंडित ठाकुर प्रशस्त पुरुषोत्तम ने कहा कि आध्यात्मिक आश्रम फाउंडेशन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों तक धर्म, अध्यात्म, योग, तंत्र एवं ज्योतिष का प्रामाणिक ज्ञान पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन का योग दर्शन भारतीय ऋषि परंपरा की मौलिक शिक्षाओं पर आधारित है, जिसमें योगमाया भगवती, योगीश्वर भगवान शिव और योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की परंपरा का समन्वित ज्ञान समाहित है।
उन्होंने कहा कि भारतीय तंत्र साधना का वास्तविक उद्देश्य केवल सिद्धियों की प्राप्ति नहीं, बल्कि आत्मोन्नति, रोगमुक्ति, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति है। उन्होंने तंत्र साधना के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित साधकों को इसके गूढ़ सिद्धांतों और व्यवहारिक पक्षों से अवगत कराया।
सायंकाल तक चला तंत्र साधना सत्र
योग एवं आध्यात्मिक चर्चा के उपरांत पंडित ठाकुर प्रशस्त पुरुषोत्तम के मार्गदर्शन में तंत्र साधना का विशेष सत्र प्रारंभ हुआ, जो सायंकाल तक जारी रहा। इस दौरान साधकों को तांत्रिक उपासना, साधना पद्धति, मंत्र शक्ति तथा आध्यात्मिक उन्नयन के विभिन्न आयामों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में फाउंडेशन की संस्थापक सदस्या नमिता ठाकुर, वर्षा दूबे, तमन्ना त्रिवेदी, अभय कुमार सिंह, चंदन कुमार, अमन कुमार सिंह, आर्यन कुमार मेहता सहित अनेक तंत्र साधकों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में फाउंडेशन की सचिव नमिता ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, साधकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।आध्यात्मिक आश्रम फाउंडेशन के इस स्थापना समारोह ने धर्म, अध्यात्म, योग, तंत्र और ज्योतिष के समन्वित स्वरूप को समाज के समक्ष प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी मानव जीवन को संतुलित, स्वस्थ, शक्तिशाली और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने की क्षमता रखती है।
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