"राजनीति को नौकरशाहों, धनबल और अवसरवादियों से मुक्त करना ही हमारा लक्ष्य है"
भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय वर्मा से विशेष बातचीत
साक्षात्कारकर्ता: संवाददाता रमेश कुमार
विशेष अतिथि: अजय वर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक)
प्रश्न:-आज अधिकांश राजनीतिक दलों में सेवानिवृत्त नौकरशाहों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों तथा दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट दिया जा रहा है। आपकी पार्टी की इस विषय पर क्या नीति है?

हम मानते हैं कि लोकतंत्र का आधार जनता है, न कि सत्ता के गलियारों में वर्षों तक प्रभावशाली पदों पर रहे लोग। जो व्यक्ति जीवनभर प्रशासनिक अथवा न्यायिक पदों पर रहा हो और सेवानिवृत्ति के बाद सीधे राजनीति में प्रवेश कर जनता का प्रतिनिधि बनना चाहे, यह लोकतांत्रिक मूल भावना के विपरीत है।
हमारी पार्टी में टिकट पाने का केवल एक ही आधार होगा - समाज सेवा। जो व्यक्ति वर्षों तक समाज के बीच रहा हो, जनता के दुख-दर्द में सहभागी रहा हो, वही चुनाव लड़ने का अधिकारी होगा।
प्रश्न:-आज राजनीति में धनबल और चुनावी प्रबंधन का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। आपकी पार्टी इसे कैसे देखती है?
अजय वर्मा:-भारत की राजनीति का सबसे बड़ा संकट यही है कि चुनाव जनता नहीं, पैसा लड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च करके टिकट खरीदने और चुनाव जीतने की संस्कृति ने लोकतंत्र को कमजोर किया है।
हमारी पार्टी में किसी भी व्यक्ति को उसके बैंक बैलेंस या आर्थिक क्षमता के आधार पर टिकट नहीं मिलेगा। यदि कोई व्यक्ति केवल इसलिए टिकट चाहता है क्योंकि उसके पास पैसा है, तो उसके लिए हमारी पार्टी में कोई स्थान नहीं है।
हम चाहते हैं कि चुनाव समाज की शक्ति से लड़ा जाए, धन की शक्ति से नहीं। हमारा उम्मीदवार वही होगा जिसके पीछे जनता खड़ी हो, न कि उद्योगपतियों और ठेकेदारों का धन।
प्रश्न:-यदि आपकी पार्टी सत्ता में आती है तो भ्रष्टाचार के विरुद्ध क्या कदम उठाएगी?
अजय वर्मा:-देश में भ्रष्टाचार केवल नेताओं तक सीमित नहीं है। इसमें कई बार नौकरशाह, राजनीतिक दल, प्रभावशाली लोग और संस्थागत तंत्र भी शामिल होता है।
हमारी पार्टी सत्ता में आने पर सभी बड़े नेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों तथा उच्च पदों पर रहे व्यक्तियों की संपत्तियों की व्यापक जांच करवाएगी। जनता को यह जानने का अधिकार है कि जिन लोगों ने सार्वजनिक जीवन में सेवा का दावा किया, उन्होंने अपनी संपत्ति कैसे अर्जित की।
हमारा उद्देश्य प्रतिशोध नहीं बल्कि पारदर्शिता है। हम चाहते हैं कि जनता स्वयं तय करे कि किसने ईमानदारी से काम किया और किसने अपने पद का दुरुपयोग किया।
प्रश्न:-बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर आपकी क्या तैयारी है?
अजय वर्मा:-बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को हम केवल एक चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक संस्कृति के परिवर्तन का अवसर मानते हैं।
हम किसी बड़े उद्योगपति, बाहुबली या राजनीतिक परिवार के सदस्य को उम्मीदवार नहीं बनाएंगे। हमारी पार्टी एक ऐसे समाजसेवी को चुनाव मैदान में उतारेगी जिसने वर्षों तक जनता के बीच रहकर कार्य किया हो।
हमारा मानना है कि विधानसभा में वही पहुंचे जो जनता की समस्याओं को वास्तव में समझता हो।
प्रश्न:-आपकी पार्टी और उसके नेताओं पर आयकर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर आप क्या कहना चाहेंगे?
अजय वर्मा:
यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) पर लगभग 480 करोड़ रुपये तथा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राकेश दत्त मिश्र पर लगभग 48 करोड़ रुपये की आयकर मांग निर्धारित की गई है।
हम पिछले तीन वर्षों से सरकार और संबंधित विभागों से एक सरल प्रश्न पूछ रहे हैं— यदि हमारे ऊपर लगाए गए आरोप सत्य हैं तो कृपया बताइए कि वह धनराशि किस बैंक खाते में जमा हुई, किस खाते से निकली और किन व्यक्तियों के हस्ताक्षर से उसका लेन-देन हुआ?
लोकतंत्र में आरोप लगाने वाले पर प्रमाण प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी होती है। आश्चर्य की बात यह है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी इन मूलभूत प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया गया है।
हम स्वयं न्यायालयों के माध्यम से सरकार से प्रमाण मांग रहे हैं। यदि कोई अपराध हुआ है तो उसका तथ्य सामने आना चाहिए, और यदि नहीं हुआ तो राजनीतिक प्रताड़ना बंद होनी चाहिए।
प्रश्न:-आप अक्सर भाजपा पर धर्म के राजनीतिक उपयोग का आरोप लगाते हैं। इसका आधार क्या है?
अजय वर्मा:-हमारा मानना है कि धर्म श्रद्धा का विषय है, सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं। आज धर्म और राजनीति के बीच की सीमाएं लगातार धुंधली की जा रही हैं।
हमारा आरोप है कि धार्मिक भावनाओं का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविक धार्मिक संस्थानों की स्थिति और उनके संसाधनों के उपयोग पर गंभीर प्रश्न मौजूद हैं।
धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्रों में बदलने की प्रवृत्ति भी चिंताजनक है। मंदिर, मठ, आश्रम और तीर्थस्थल केवल पर्यटन स्थल नहीं हैं; वे करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। जब इन्हें केवल पर्यटन और राजस्व के दृष्टिकोण से देखा जाता है, तब उनकी आध्यात्मिक पहचान प्रभावित होती है।
हम मानते हैं कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण उनकी मूल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरिमा के साथ होना चाहिए।
प्रश्न:-भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) की दीर्घकालिक राजनीतिक दृष्टि क्या है?
अजय वर्मा:-हम एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते हैं जहां राजनीति सेवा का माध्यम बने, व्यवसाय का नहीं। जहां टिकट खरीदने वाले नहीं बल्कि समाज के लिए संघर्ष करने वाले लोग संसद और विधानसभा तक पहुंचें।
हमारी राजनीति जाति, धर्म, धन और परिवारवाद के आधार पर नहीं बल्कि चरित्र, सेवा और जनसमर्थन के आधार पर होगी।
देश को ऐसी राजनीति की आवश्यकता है जिसमें जनता सबसे ऊपर हो और सत्ता जनता के प्रति जवाबदेह हो। भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) इसी वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
अजय वर्मा का दावा है कि भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) पारंपरिक राजनीति की स्थापित धारणाओं को चुनौती देने का प्रयास कर रही है। पार्टी समाजसेवा आधारित नेतृत्व, धनबल-मुक्त चुनाव, प्रशासनिक एवं राजनीतिक जवाबदेही तथा धार्मिक आस्था के संरक्षण को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखती है। बांकीपुर उपचुनाव को पार्टी इसी वैचारिक संघर्ष की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देख रही है।यह आलेख साक्षात्कार, प्रेस विज्ञप्ति, संपादकीय या पार्टी घोषणा-पत्र शैली में उपयोग किया जा सकता है।
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