तुम्हें देख, प्रणय प्रसून खिले सजीले
कुमार महेन्द्रमुखमंडल नव-कमल सुशोभित,
दृष्टि में अनुराग अथाह।
भाव-भंगिमा शशि-सी चारु,
झरता सुधामय मधु-प्रवाह।
चाल तुम्हारी चंचल मयूरी,
नयन सलोने स्वप्न रंगीले।
तुम्हें देख, प्रणय प्रसून खिले सजीले।।
परिधानों से झरे सुरभि-सी,
मधुऋतु की मादक परछाई।
आत्मिकता की उज्ज्वल आभा,
मन वीणा में राग समाई।
सरस मधुर संवाद तुम्हारे,
हिय में रचते चित्र छबीले।
तुम्हें देख, प्रणय प्रसून खिले सजीले।।
बिंदी-सिंदूर छटा मनोहर,
चूड़ी-पायल मधुर झंकार।
स्वर में मधु-अर्णव की गूँजें,
शब्द बिखेरें प्रेम अपार।
अंग-अंग अरुणिम प्रभात-सा,
अधर सुधा से भरे रसीले।
तुम्हें देख, प्रणय प्रसून खिले सजीले।।
केश-लहरियाँ घन-श्यामल-सी,
शील-सुगंधित हर व्यवहार।
नेह-तरंगित अंतःकरण में,
प्रेम रचे नव स्वर्णिम संसार।
मिलन-प्रतीक्षा में लोचन मेरे,
बन जाते सावन गीले।
तुम्हें देख, प्रणय प्रसून खिले सजीले।।
रूप तुम्हारा सृष्टि-विभूति-सा,
मृदु मुस्कान मधुमास बनी।
स्पर्श कल्पना से ही मन में,
प्रेम-सुधा की प्यास जगी।
तुम जीवन की मधुर कामना,
भाग्य-विहँसते पुष्प नशीले।
तुम्हें देख, प्रणय प्रसून खिले सजीले।।
कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews