बिना माथा के
--:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र"अणु"
सुनते आ रहा हूँ..मैं...
ये परंपरा से....कि..
गया के लोग-
होते हैं बिना माथा के!!
है यहाँ पर पहाड,
बिना लता,वृक्ष,झाड,
कोमल कलरव,पछाड,दहाड-
प्रेतों की नगरी,जिंदा हाड,
सहचर आदि अनंत गाथा के!!
होते हैं बिना माथा के!!
फल्गु का रेत,
खोजते हैं पूर्वज बनकर प्रेत,
नहीं है तर्पण के लिए कहीं जल-
फूल,फल,तुलसीदल,
फिर भी सनातनी झुंड,
दे रहा है रोज पिंड,रोज मुंड-
ले श्रद्धा भक्ति,पाने को मुक्ति,
मंगला गौरी गदाधरनाथा के!!
बिना माथा के!!
वलिदाद,अरवल(बिहार) 804402.
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