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कमल का कमाल

कमल का कमाल

कमल ने तो कमाल कर दिया ,
भगवामय ये बंगाल कर दिया ,
बने अबतक जो शक्तिशाली ,
कमल ने ही कंगाल कर दिया ।
गला को गला गाल कर दिया ,
तृणमूल खोद ताल कर दिया ,
गाल को भी ऐसा है फुलाया ,
फुलाकर फुटबॉल कर दिया ।
मैदान ए चुनावी जंग दिखा ,
अतिबदतर ये साल कर दिया ,
अबतक न हुआ तृणमूल हाल ,
तृणमूल को बदहाल कर दिया ।
अपना किला गाड़ रखीं दीदी ,
कमल ने उसे उखाड़ दिया ,
खोई पड़ीं होशोहवास दीदी ,
जीते जी कमल ने मार दिया ।
बंगाल को तूने बंगला बनाई ,
चूस चूस कर कंगला बनाई ,
पा न सकेगी प्यार बंगाल का ,
कमल ऐसा लाचार कर दिया ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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