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अनमोल तोहफ़ा

अनमोल तोहफ़ा

संजय जैन

चाँद सितारे झूम रहे है
देखो आकाश में।
हम सब भी नाच रहे है
देखो आज बाग में।
फूल पत्ती डाली वृक्ष
झूम उठे है बाग के।
रात रानी ने महका दिया
खुशबू से सारे बाग को।।


नदी तालाब सागर भी
शोभित कर रहे धरा को।
मंद हवाएं हल्की बारिस
पृथ्वी को हराभरा कर दिये।
जिससे पशु-पक्षी नर-नारी
मौज-मस्ती संग झूम उठे।
ऐसा दृश्य दिखकर बाग
स्वर्ग जैसा बन गया।


सूरज की लालिमा दिन में
सारे बाग में विखर गई।
पक्षियों ने ची-ची करके
चहका दिया बाग को।
चाँद ने रात को बिछा दी
अपनी प्यारी चांदनी को।
और मोतियों को बिखेर दिया
हरी-हरी बाग की घास पर।।


देख बाग दृश्य आज का
जिससे प्रेम उमड़ पड़ा।
प्यार मोहब्बत का माहौल
फिर बाग में दिखने लगा।
मौसम के मिजाज के कारण
पूरा बाग महक उठा।
प्रकृति का ये अनमोल तोहफ़ा
हम सबको विधाता ने दिया।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई


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