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हमारी करनी

हमारी करनी

संजय जैन
कर्म हमारे बेरी हो गये
सनम हमारे रूठ गये।
देख हमारे हालातो को
सगे संबधी भी छुट गये।
दुनिया का दस्तूर निराला
जिसे समझना भूल गये।
जीवन का सबसे बड़ा
क्या सत्य हम भूल गये।।


कल के हालातों का
किसको है पता क्या।
सोच-सोच कर दिमाग
अब तो कुंठित हो रहा।
दर-दर की ठोकर खाने से
भला किसी का हुआ है क्या।
सोच सकारात्मक रखोगे अगर तो
तुमको मिलेगा सुकून बहुत।।


बैर भाव स्नेह प्यार का
आपस में संतुलन रखो।
दिलकी अपनी पीड़ा का
जिक्र किसी से न करो।
अति उत्साहित होने पर
शब्दो पर सयंम रखो।
अपनी कमजोरी का भी
राज किसी से मत बोलो।।


दुनिया की ये रीत है
कमजोरो पर बार करो।
खुदको बहुवाली बनाने
लोगों पर अत्याचार करो।
समाज की दुखती नश पर
मौका देख तुम प्रहार करो।
घुटने टेक देंगे सब जन
और करने लगेंगे जय-जय कार तेरी।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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