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हे कालरात्रि कल्याणी,सबका उद्धार करो

हे कालरात्रि कल्याणी,सबका उद्धार करो

कुमार महेन्द्र
रूप विकराल रुद्र श्रृंगार,
छटा रम्य सौम्य मनोहारी ।
सघन तिमिर-सम वर्णा दर्शन,
साधक-जन हित अति शुभकारी ।
संपूर्ण ब्रह्मांड सिद्धि-वृष्टि,
माँ दुःख-कष्ट-पीड़ा समूल हरो ।
हे कालरात्रि कल्याणी,सबका उद्धार करो ।।


महायोगीश्वरी महायोगिनी शुभंकरी,
माँ कालरात्रि अनेक नाम ।
रौद्र छवि अप्रतिम झलक,
दानवी शक्ति करे काम तमाम ।
शुम्भ-निशुम्भ रक्तबीज संहार,
माँ देवलोक सदा अग्र पद धरो ।
हे कालरात्रि कल्याणी,सबका उद्धार करो ।।


चार भुजा त्रिनेत्र विशाल,
कर खड्ग लौह-अस्त्र धारी ।
गर्दभ-आरूढ़ा अभय-वर मुद्रा,
सदैव भक्तजन हितकारी ।
शत्रु-विजय दृढ़ संकल्प-पथ,
माँ शक्ति-भक्ति वर पार उतरो ।
हे कालरात्रि कल्याणी,सबका उद्धार करो ।।


नील वर्ण प्रिया माता,
भय-रोग-संताप हरण ।
भूत-प्रेत अकाल-मृत्यु,
सहज समाधान श्री चरण ।
महासप्तमी साधना फलित कर,
माँ सुख-समृद्धि वैभव भंडार भरो ।
हे कालरात्रि कल्याणी,सबका उद्धार करो ।।


कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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