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प्यार हमारा अनमोल

प्यार हमारा अनमोल

संजय जैन

सीने से लगाकर तुम्हें,
बस इतना ही कहना है।
जिंदगी भर अब मुझको,
रखना अपनी बाहों में।।

साँसों में तुम बसे हो,
दिल पर लिखा तेरा नाम।
खुश हूँ अगर आज तो,
ये है तेरा एहसान।।

आँखो में हर पल तेरी,
दिखती है एक तस्वीर।
दिल और दिमाग पर मेरे,
बस छाएँ हुए तुम हो।।

भूलकर भी छोड़ने का मुझे,
इरादा मत करना कभी तुम।
वरना मेरी मौत का तुम्हें,
मिल जायेगा जल्दी पैग़ाम।।

देख सकता नहीं तुझे मैं,
किसी और के बाहों में।
क्योंकि ये दिल तेरे बिन,
कही और लगता ही नही।।

मेरी सांसो पर तेरा जो,
अब नाम लिखा गया है।
जीती और मारती हूँ बस,
अब मैं सिर्फ तुम्हारे लिए।।

जीवन का रस पान किये,
तुम जो मेरे संग।
हर अंग पर लिखा है,
तब ही से तेरा नाम।।
मानव जीवन की रातें वो,
सब लिखी है तेरे नाम।
घर के आंगन में अपने,
एक फूल खिल उठा है।
जीवन भर की ये अब,
मानों हमारी धरोहर है।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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