"सहयात्रा का मौन"
पंकज शर्मामेरी शब्दों की यात्रा केवल मेरी नहीं है—
यह उस पगडंडी की तरह है
जहाँ पदचिन्ह एक के होते हैं
और दिशा दो की।
मैं लिखता हूँ,
पर लिखे हुए में
आपका मौन भी घुला है—
एक अदृश्य स्याही की तरह।
यह यात्रा किसी गंतव्य की खोज नहीं,
बल्कि उस ठहराव की पहचान है
जहाँ प्रश्न
उत्तर से पहले सांस लेते हैं।
मैं और आप सहयात्री हैं—
कोई आगे नहीं, कोई पीछे नहीं,
बस समान गति से
समय के कंधे पर हाथ रखे।
कभी मैं पंक्तियों का भार उठाता हूँ,
शब्दों की गठरी
कंधे पर कस कर बाँध लेता हूँ,
ताकि अर्थ बिखर न जाए।
कभी मौन के अर्थ खोजता हूँ—
उस रिक्ति में
जहाँ न शब्द हैं, न व्याख्या,
केवल अनुभूति का कंपन।
आप वहाँ होते हैं
बिना कहे,
बिना दिखे—
पर पूरी तरह उपस्थित।
और तब समझ आता है—
साहित्य संवाद नहीं,
सह-अस्तित्व है;
जहाँ यात्रा लिखी नहीं जाती,
जी ली जाती है।
. स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित
✍️ "कमल की कलम से"✍️ (शब्दों की अस्मिता का अनुष्ठान)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com