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"सजग साधना का सुख"

"सजग साधना का सुख"

 पंकज शर्मा 
सच्चा संतोष बाह्य उपलब्धियों की चकाचौंध में नहीं, अपितु अंतर्मन की शांत ज्योति में जन्म लेता है। जब वह मनुष्य प्रयत्न, आत्मचिंतन एवं आत्मबोध की साधना करता है, तब वह अपने अस्तित्व के गूढ़ अर्थ से परिचित होता है। यही जागरूकता उसे क्षणिक आकर्षणों से ऊपर उठाकर स्थायी संतुलन की ओर ले जाती है।

मानसिक सुख आकस्मिक प्रसाद नहीं, बल्कि सजग साधना का फल है। जो व्यक्ति अपने विचारों, इच्छाओं एवं कर्मों को विवेक से दिशा देता है, वही अंतःशांति का अनुभव करता है। संकल्पपूर्वक आत्म-विकास का मार्ग अपनाने से जीवन में स्थिर प्रसन्नता का उदय होता है, जो परिस्थितियों से परे, आत्मा की गहराइयों में प्रतिष्ठित रहती है।

. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) 
 पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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