भारत में जातिगत राजनीति
जय प्रकाश कुवंरभारत के राजनीतिक अभिभावकों ने,
देश में जाति का ऐसा पाठ पढ़ाया है।
जाति का विष वेल अब लगता है,
वट वृक्ष बन के सामने आया है।।
देश का कोई क्षेत्र अब न बचा है,
जहाँ जाति की न चर्चा हो।
खेल के मैदान में भी अब यह,
जाति चर्चा का भूत समाया है।।
लगता है कि खेल भी खेला जाएगा,
भारत में अब जातिगत समीकरण से।
वाह रे भारतवर्ष तेरे किस्मत में,
यह कौन सा दिन देखने को आया है।।
ऐसा रहा तो कल को फौज में भी,
जाति का भूत समायेगा।
इस गंदे जातिगत समीकरण के चलते,
यह देश रसातल को चला जाएगा।।
नेता चाहे जिस किसी दल के हों,
एक दिन अपने अपने ठिकाने लग जाएंगे।।
अभी कुछ वर्षों पहले हम आजाद हुए हैं,
जाति में बंटकर फिर हम गुलाम बन जाएंगे।।
एक नारा रोज सुनाई देता है,
"बंटोगे तो कटोगे "।
फिर राजनीतिज्ञ जाति धर्म में हमें क्यों बांट रहे हैं।
यह मंत्र फिर किसके लिए है,
अगर सब नेता जाति की फिलासफी ही छांट रहे हैं।।
अभी कुछ नहीं बिगड़ा है,
जाति की राजनीति देश में हर जगह बंद करो।
हमारे पूर्वजों ने एक होकर आजादी पाई है,
हम में फुट मत डालो,एक होकर आजाद रहने दो।।
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