रामायण का सार मां सीता है
कुमार महेंद्रजनक दुलारी महिमा अद्भुत,
प्रातः वंदनीय शुभकारी ।
राम रमाकर रोम रोम,
पतिव्रता अनन्य अवतारी ।
शीर्ष आस्था सनातन धर्म,
चरित्र अंतर निर्झर गीता है।
रामायण का सार मां सीता है ।।
मृदु विमल अर्धांगिनी छवि,
प्रति पल रूप परछाया ।
प्रासाद सह वनवास काल,
अगाथ जप तप नेह निभाया ।
शील समर्पण त्याग अनन्या,
व्यक्तित्व आदर्श सुनीता है ।
रामायण का सार मां सीता है।।
जनमानस प्रश्न समाधान हित,
उत्तीर्ण कठिन अग्नि परीक्षा ।
शक्ति भक्ति मोहक सुरभि ,
नित राम रूप सकल प्रतीक्षा ।
पुत्री वधु रूप जनक नंदिनी,
अनीता संजीता पुनीता है ।
रामायण का सार मां सीता है।।
रामवल्लभा तो साक्षात ,
मां लक्ष्मी भव्य अवतार ।
जीवन पथ मंगल कंवल,
प्रेरणा सरित अमृत धार ।
जीवन अवश संघर्ष पर्याय,
युगे युगे नमित राघव परिणीता है।
रामायण का सार मां सीता है ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com