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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति

जय प्रकाश कुवंर
संक्रांति शब्द का अर्थ होता है एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाना , तथा मकर संक्रांति सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश या गमन को कहा जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार कुल १२ राशि, १२ महीने, १२ ग्रह और २७ नक्षत्र होते हैं। सभी राशियाँ ब्रह्माण्ड को १२ बराबर हिस्सों में बांटती हैं। एक राशि में रहने का समय ग्रह के अनुसार अलग अलग होता है।
१२ राशियों के नाम :- मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन।
१२ महिनों के नाम :- चैत्र, बैसाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भादों, आश्विन, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ और फाल्गुन।
१२ ग्रहों के नाम :- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, वृहस्पति, शुक्र, शनि, राहू, केतु, अरुण, वरुण और प्लूटो।
२७ नक्षत्रों के नाम :- अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आद्रा, पुनर्वसु, पुष्पा, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्र, उत्तराभाद्र और रेवती।
ज्योतिष के अनुसार ग्रह, नक्षत्र और राशियाँ सभी चलायमान हैं और गति बदलती रहती हैं। ये सभी पृथ्वी और ग्रहों की गति के कारण लगातार बदलते रहते हैं तथा जीवन को प्रभावित करते हैं।
साल में कुल १२ संक्रांति होती है, जो १२ महीनों के बराबर होती है। सूर्य के एक संक्रांति से निकलकर दूसरे संक्रांति में प्रवेश की अवधि ही सौरमास कहलाता है।
इन सभी १२ संक्रांतियों में मकर संक्रांति सबसे प्रमुख है। यह समय हर साल लगभग १४ या१५ जनवरी को पड़ता है। इस दिन सूर्य पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध ( दक्षिणायन ) से उत्तरी गोलार्ध ( उत्तरायण ) में प्रवेश करते हैं। इस दिन से दिन क्रमश: लम्बा होने लगता है। इस दिन से एक महीने से चल रहा खरमास यानि अशुभ दिन का समापन हो जाता है। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य के उत्तरायण होने को देवताओं का दिन भी कहा जाता है। इस दिन से गृह प्रवेश, विवाह तथा मुंडन संस्कार आदि शुभ कार्य पुनः आरंभ हो जाते हैं।
मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान, जप तप का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन तिल और गुड़ का दान तथा सेवन बेहद शुभ माना जाता है।
जय प्रकाश कुवंर
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