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बदनाम कर दिया

बदनाम कर दिया

संजय जैन

न हम उन्हें भूल सकते है
न वो हमें भूल सकते है ।
जो हमारी यादों में बसते है
वो ख्यालों से निकलते नही।
मोहब्बत वो रस है यारो
जिसे तुम पीकर देखो।
यादों के सागर में तुम
एक बार डूब कर देखो।।


वो भले ही भूल जाएं
पर हम तो भूलते नही।
जो वक्त साथ बिताया है
उस वक्त को कैसे भूल जाएँ।
अब दौर ये कैसा आया
जिसे कभी दिखा नही।
बाप बेटे की जुगल बंदी
पीने की साथ देखने मिली।।


शर्म हया और मर्यादा
अब बिल्कुल बची नही।
रिश्तों की समझ भी
अब किसी में बची नही।
शर्मसार कर रहे है देखो
अपने घृणित कार्यों से।
कुल का नाश कर दिया
अपने ही घर के लोगों ने।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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