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भगवान श्री राम और राजनीति

भगवान श्री राम और राजनीति

जय प्रकाश कुवंर
भारतवर्ष में जब से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आधारित भारतीय जनता पार्टी देश की सत्ता में आयी है और कांग्रेस सत्ता से बेदखल हुयी है, तब से कांग्रेस सहित कुछ विरोधी पार्टियां, जो खासकर आम्बेडकरवादी, बौद्ध, इसाई तथा मुस्लिम मानसिकता से ग्रसित हैं, वे लोग भगवान श्री राम, रामायण, मनुस्मृति तथा सनातन धर्म एवं आर्यों को लेकर काफी दुष्प्रचार कर रहे हैं। भगवान श्री राम को लेकर देश और समाज में तरह तरह की भ्रांतियां फैलायी जा रही हैं। विरोधी पार्टियों की सत्ता में पुनः लौट आने की सारी राजनीति आज कल राम के इर्दगिर्द घुमकर हिन्दूओं में फुट डालने और राम के अस्तित्व को नकारने में लगी हुई है। कुछ लोग तो राम को एक कल्पित व्यक्ति मानते हैं और उनके अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं।
ऐसे लोग एक तरफ श्री राम के अस्तित्व और सत्ता को अस्वीकार करते हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें अन्यायी और हत्यारा कहते हैं। यह अपने आप में दिखाता है कि या तो ऐसे लोगों की बुद्धि का दिवाला निकल गया है, या फिर ये अपनी बुद्धिमत्ता को क्रिश्चियन मिशनरियों तथा मुस्लिम मुल्लाओं के हाथों बेंच चुके हैं। बामपंथियों के चेले और अंग्रेजों तथा मुसलमानों के तलवे चाटने वाले देशद्रोही ही श्री राम जैसे महापुरुषों की निंदा कर सकते हैं और उनके अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगा सकते हैं।
भगवान श्री राम काल्पनिक हैं या ऐतिहासिक, यह एक गहरा और आस्था से जुड़ा प्रश्न है। यह व्यक्तिगत विश्वास और दृष्टिकोण पर आधारित है तथा पूर्णतया इस पर निर्भर करता है। हिन्दू धर्म में श्री राम को भगवान विष्णु का अवतार और एक वास्तविक व्यक्ति माना जाता है, जो त्रेतायुग में अयोध्या के वास्तविक राजा थे। हिन्दुओं का पवित्र ग्रंथ रामायण उनके जीवन पर आधारित है। भारतवर्ष में बहुत बड़ी संख्या में लोग भगवान श्री राम को एक ऐतिहासिक व्यक्ति और मर्यादापुरुषोत्तम मानते हैं।
भगवान् श्री राम, अयोध्या, श्री लंका तथा रामसेतू आदि पर कुछ शोधकर्ताओं द्वारा अनर्गल बातें करना भी महज उनकी बामपंथी और देशद्रोही मानसिकता से पीड़ित होने के सिवाय और कुछ नहीं है।
भगवान् श्री राम के अस्तित्व और व्यक्तित्व के समर्थन में अनेक धार्मिक, सास्कृतिक और शोध आधारित तर्क दिये जाते हैं। फादर कामिलबुल्के तथा कुछ अन्य शोधकर्ताओं ने राम के जन्म की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए अनेक तथ्य और प्रमाण पेश किये हैं, जिसे जानने,पढ़ने और समझने की जरूरत है।
श्री रामचरितमानस में भी एक ऐसा प्रसंग आया है जिसमें स्वयं भगवान् शिव जी अपनी पत्नी माता पार्वती से कह रहे हैं कि भगवान् श्री राम के सगुण चरित्र को बल बुद्धि और वाणी से तर्क नहीं किया जा सकता है।
"चरित राम के सगुन भवानी।
तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।। "
अतः भगवान् शिव जी सांसारिक शिक्षा स्वरूप कहते हैं कि,
" अस बिचारि जे तग्य बिरागी।
रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।
अर्थात भगवान् शिव जी का कहना है कि ऐसा विचार कर वह मनुष्य जो सांसारिक इच्छाओं और मोहमाया को त्याग देता है और इस विशेष क्षेत्र में गहरा ज्ञान प्राप्त कर लेता है, वह सब तर्क छोड़ कर ईश्वर में लीन होकर प्रभु श्री राम को भजता है।
अतः भगवान् श्री राम के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है और उनका भजन कीर्तन एवं उनमें पुर्ण आस्था और विश्वास ही मनुष्य के लिए एक मात्र परम सहारा है। हमें राम के विषय में अनर्गल दुष्प्रचार और सत्ता के लिए राजनीति करने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है और भगवान् श्री राम में पूर्ण आस्था बनाये रखने की जरूरत है।
जय श्री राम🙏
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