बाबा का बुलडोजर
जय प्रकाश कुवंरनाजायज कब्जा धारियों का,
हर रोज दिल दहल रहा है।
जिधर देखो उधर सब जगह,
बाबा का बुलडोजर चल रहा है।।
तब ना होश था किसी को ,
जब तीन का तेरह बनाया।
अवैध जमीं हड़प कर,
उस पर आलीशान महल बनाया।।
नाली रास्ता सब पट गया,
तेरी शान शौकत के आगे।
अब छोड़ना पड़ रहा है उसे तो,
क्यों रो रहे हो अभागे।।
जगह जमीन हड़पने की एक,
दबंगई और कुरीति चल रही थी।
बहुत दिनों तक सरकार चुप थी,
इच्छा शक्ति ढीली पड़ रही थी।।
अब देश में एक यह हवा चल रही है,
कोई भी अबैध निर्माण रह न पायेगा।
देर सबेर समेट लो अपनी हस्ती को,
नहीं तो बाबा का बुलडोजर चल जाएगा।।
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