ऊंट मरुधरा की आन बान शान
कुमार महेंद्रथार मरुस्थल जीवन रेखा,
जनमानस अभिन्न अंग ।
लोक परंपरा संस्कार वाहक,
काया सौष्ठव मस्त मलंग ।
श्रम धैर्य स्वभाव प्रतिष्ठा,
संघर्ष अंतर विजयी आह्वान ।
ऊंट मरुधरा की आन बान शान ।।
शीर्ष भूमिका मरु अर्थव्यवस्था,
जीविकोपार्जन परम आधार ।
आनंद कड़ी विवाह उत्सव,
त्योहार मेले आकर्षण अपार ।
राजस्थान राज्य पशु पदवी,
पोषण संरक्षण प्रयास सुजान ।
ऊंट मरुधरा की आन बान शान ।।
जीवंत परिभाषा थार संस्कृति,
मधुर सरस नृत्य अठखेलियां ।
कथा गीत वात पटल सौम्यता,
प्रेरणा जीवन संघर्ष पहेलियां ।
अनन्य लैला मजनू ढोला मारु,
मनोरम प्रेम कहानी योगदान ।
ऊंट मरुधरा की आन बान शान ।।
मोहक ऊंट महोत्सव बीकानेर,
सर्वत्र उत्साह उमंग उल्लास ।
सजग प्रयास महिमा मंडन,
कण कण लोक संस्कृति उजास ।
नमन गति सौंदर्य सहनशील जीव,
कामना सदा स्तुति गौरव गुणगान ।
ऊंट मरुधरा की आन बान शान ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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