अंतरराष्ट्रीय हिन्दी दिवस पर
खुली आँखों से देखता हूँ बस सपने तेरे,तेरी चाहत जन जन में फैलाना चाहता हूँ।
संयुक्त राष्ट्र भाषा बनाने का मकसद समझ,
विश्व पटल पर परचम फहराना चाहता हूँ।
जानता हूँ तेरी चाहत उडने की खुले गगन में,
हिन्दी को बाज से सशक्त पंख देना चाहता हूँ।
मेरी चाहत, मेरा सपना, मेरा प्यार यही तो है,
वेद ऋचाओं का सार दुनिया को बताना चाहता हूँ।
सभ्यता, संस्कृति, मानवता, सब भारत की देन,
भारत को फिर से विश्व गुरू बनाना चाहता हूँ।
संस्कृत को देव वाणी शास्त्रों में बताया गया,
हिंदी की सरलता को विश्व भाषा बनाना चाहता हूँ।
डॉ अ कीर्तिवर्धन
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