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हिमकर श्याम के गजल संग्रह 'दिल बंजारा' का लोकार्पण

हिमकर श्याम के गजल संग्रह 'दिल बंजारा' का लोकार्पण

रांची।झारखंड के प्रख्यात गजलकार हिमकर श्याम के गजल संग्रह ‘दिल बंजारा' का लोकार्पण जिला स्कूल मैदान में आयोजित पुस्तक मेले में शनिवार को हुआ। अतिथियों एवं श्रोताओं का स्वागत वरिष्ठ साहित्यकार निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने किया। हिमकर श्याम का संक्षिप्त परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि हिमकर ने विपरीत परिस्थितियों को भी अपने जीवन का हथियार बना दिया है। उसी की परिणति है दिल बंजारा। पिता होने के नाते मुझे गर्व है।


गीता सिन्हा गीतांजलि के सरस्वती वंदना से पुस्तक विमोचन समारोह का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का सधा हुआ एवं प्रभावशाली संचालन ममता मनीष सिन्हा ने किया। मंचासीन अतिथियों को जन कल्याण विकास संस्थान के सचिव विशाल कुमार ने पुष्प गुच्छ दे कर सम्मानित किया। संस्था की ओर से हिमकर श्याम को सोहराई पेन्टिंग भेंट की गई।


विमोचन के बाद वक्ताओं ने कहा कि ग़ज़लों की दुनिया में हिमकर श्याम की अपनी अलग पहचान है। ग़ज़ल की नज़ाकतों से पूरी तरह वाकिफ हैं और शिल्प का अच्छा ज्ञान हैं। हिमकर की ग़ज़लें दिल से निकली हुई ग़ज़लें हैं और दिल को छूती हैं। दिल बंजारा की ग़ज़लें जीवन के कई रंग देखने को मिलते हैं। डाॅ. जंग बहादुर पाण्डेय ने संग्रह पर बोलते हुए कहा कि इसमें 101 ग़ज़लें हैं और सभी किसी चांद-सितारे से कम नहीं हैं। उन्होंने संग्रह की पहली ग़ज़ल जो कि मां पर है की चर्चा करते हुए कहा कि मां से बड़ा दुनिया में कुछ भी नहीं। माँ पर लिखी गई यह ग़ज़ल भावपूर्ण है और हर दिल पर अपना प्रभाव छोड़ती है। वह कार्यक्रम अध्यक्ष भी थे। वहीं हिमकर श्याम ने कहा कि 'दिल बंजारा' की ग़ज़लें पाठकों के मन में हल्की-सी भी संवेदना जगा सकें, तो मैं अपनी लेखनी को सार्थक समझूँगा।


मौके पर 'दिल बंजारा' की ग़ज़लों का पाठ एवं गायन वरिष्ठ कवयित्री वीणा श्रीवास्तव, चंद्रिका ठाकुर देशदीप, गिरिजा कोमल, कामेश्वर सिंह कामेश तथा मीरा सोनी द्वारा प्रस्तुत किया गया। धन्यवाद ज्ञापन आसित कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि हिमकर श्याम का नाम झारखंड के उम्दा ग़ज़लकारों में शुमार है और दिल बंजारा ग़ज़लों की एक श्रेष्ठ किताब है। कार्यक्रम में समय इंडिया के प्रबंन्ध न्यासी और इस कार्यक्रम के आयोजक चन्द्र भूषण, अमरेंद्र कुमार, मधुकर श्रीवास्तव, श्रीनिवास, नवेन्दु उन्मेष, मीनू मीना सिन्हा, संगीता कुजारा, राकेश रमण, अंजेश कुमार, मनोज सिन्हा, पूनम वर्मा, मधुकर श्याम, शक्ति, रविकर, लता, अक्षिता और संजय वर्मा आदि उपस्थित रहे।


विदित हो कि हिमकर की ग़ज़लें अनेक महत्वपूर्ण संकलनों में सम्मिलित हैं। इनका काव्य संग्रह 'युद्धरत हूं मैं' भी चर्चित कृति है। दोहा संग्रह ‘जीवन की बारहखड़ी’ शीघ्र प्रकाशित होने वाला है। इन्होंने ग़ज़ल संग्रह 'बाद-ए- सबा' और काव्य संग्रह 'ज़िंदगी @ लॉकडाउन का संपादन किया है।
प्रस्तुति_दुर्गेश मोहनबिहटा, पटना (बिहार)
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