बस धीरज का छोर न छूटे
अरुण दिव्यांशक्यूॅं चेहरा दिखता लूटे लूटे ,
कभी आस का डोर न टूटे ।
जीवन का डोर आस लगा ,
बस धीरज का छोर न छूटे ।।
जीवन तो बना यह पतंग है ,
आस विश्वास पतंग है डोर ।
वारिस तो रहता यह नीचे ,
जिसके हाथ डोर बागडोर ।।
पता न कब डोर कट जाए ,
या स्वत: उखड़ जाए पतंग ।
बागडोर रह जाता हाथ में ,
पतंग करता हवा से जंग ।।
पतंग काम उड़ना कटना ,
प्रकृति का ही ये नियम है ।
हमारा काम जीवन जीना ,
और संग रखना संयम है ।।
संयम रखो व धीरज रखो ,
वह जीवन सुरक्षित रखेगा ।
बस धीरज का डोर न छूटे ,
अन्यथा मजा भी तू उखेगा ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com