मैं अजर अमर सोमनाथ हूं
कुमार महेंद्रपुनीत पावन आध्यात्म सौष्ठव,
इतिहास उत्थान पतन ओतप्रोत ।
सनातन आस्था परम शिखर,
कण कण अंतर शिवत्व ज्योत ।
बारह ज्योतिर्लिंग प्रथम उपमा,
अष्ट प्रहर कृपा वृष्टि अगाध हूं ।
मैं अजर अमर सोमनाथ हूं ।।
चंद्रदेव सोमराज कर कमल,
मंदिर निर्माण प्राण प्रतिष्ठा ।
सहन वहन गजनवी आक्रमण,
जीर्णोद्वार भीम भोज निष्ठा ।
झेल सत्तरह अस्तित्व प्रहार,
हिंद शौर्य शक्ति भक्ति गाथ हूं ।
मैं अजर अमर सोमनाथ हूं ।।
दिव्य अवस्थिति सौराष्ट्र गुजरात,
वेरावल अरब सागर किनारे ।
मनोहारी प्रभास पाटन छटा,
दर्शन दुःख कष्ट समूल उबारे ।
अतुलित स्वर्णिम मधुरिम छवि,
भारती स्वाभिमान गौरवमयी माथ हूं ।
मैं अजर अमर सोमनाथ हूं ।।
मनोरम चालुक्य वास्तुकला,
अखंड ज्योति दर्शन चमत्कार ।
ब्रह्मांडीय महत्ता बाण स्तंभ,
त्रिवेणी संगम स्नान महिमा अपार ।
अंतःकरण वैदिक सुरम्य भोर,
हिंदुत्व धर्म ध्वजा परम हाथ हूं
मैं अजर अमर सोमनाथ हूं ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com