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वैदिक गांव इमलिया का में सामवेद पारायण यज्ञ हुआ संपन्न

वैदिक गांव इमलिया का में सामवेद पारायण यज्ञ हुआ संपन्न

ग्रेटर नोएडा। यहां पर गांव इमलियाका में सामवेद पारायण यज्ञ का आयोजन किया गया। शिक्षा जगत से जुड़े परिवार के वर्तमान उत्तराधिकारी प्रवीण नागर ने अपने पिता स्वर्गीय धनराज नागर की स्मृति में इस यज्ञ का आयोजन किया। सारे यजमान परिवार ने आयोजन को सफल करने में अपने पूर्ण समन्वय का परिचय दिया।
श्री प्रवीण नागर गांव घोड़ी बछेड़ा के इंटर कॉलेज में अध्यापक के रूप में सेवारत हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय धनराज नागर ने इस यज्ञ का संकल्प अपने जीवन काल में लिया था। अब उनका संकल्प है कि वह जीवन भर इस प्रकार के यज्ञ करते कराते रहेंगे। इस यज्ञ को
वैदिक पुरोहित श्री इन्द्रराज शास्त्री की प्रेरणा, उनके कुशल मार्गदर्शन व वैदिक विद्वान आचार्य राजदेव के ब्रह्मत्व में संपन्न कराया गया। जबकि वेद पाठ गुरुकुल मंझावली के ब्रह्मचारी गण द्वारा संपन्न किया गया। यज्ञ के दूसरे दिन प्रातः कालीन तीसरे सत्र में आर्य उप प्रतिनिधि सभा के पदाधिकारी गण ने यज्ञ में सहभागिता की। इस अवसर पर आयोजक यज्ञमान परिवार को सभा के प्रधान डॉ राकेश कुमार आर्य ने वैदिक साहित्य व आर्य उप प्रतिनिधि सभा की वार्षिक पत्रिका आर्योदय स्मारिका देकर सम्मानित किया। इसी प्रकार अन्य विद्वानों को भी स्मारिका दी गई।
सभा के प्रधान डॉ राकेश कुमार आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि जिस देश के इतिहास में नालायक लोगों का सम्मान करते हुए उन्हें महिमामंडित किया जाता है, उस देश में अकाल, मरण और भय का साम्राज्य हो जाता है। दुर्भाग्य से देश के इतिहास में अकबर जैसे उन व्यभिचारी, अत्याचारी और पापाचारी लोगों को नायक के रूप में पढ़ाया गया है, जिनका पूरा जीवन हिंदुओं पर अत्याचार करने के रूप में बीता। उन्होंने कहा कि जैसा राजा होता है वैसी ही प्रजा हो जाती है। आज समाज में जिस प्रकार का अत्याचार पूर्ण माहौल बना हुआ है, वह हमारे इतिहास में की गई छेड़छाड़ का परिणाम है। यदि चरित्रवान लोगों का इतिहास हमारी युवा पीढ़ी को पढ़ाया जाता तो जिस प्रकार आज युवा पथभ्रष्ट होकर अनर्थकारी कार्य कर रहा है, वह कदापि नहीं करता। डॉ आर्य ने कहा कि हमें दहेज जैसी बीमारी से भी मुक्ति पाने के लिए आगे आना होगा। आर्य समाज इतिहास बोध कराने वाली संस्था है। इसके साथ जुड़ने का अर्थ है अपने जीवन को आत्म कल्याण और लोक कल्याण के मार्ग पर डालना।
आर्य प्रतिनिधि सभा गौतम बुद्ध नगर की भाषा प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने इस अवसर पर कहा कि गांव इमलिया का एक वैदिक ग्राम है। जिसने यज्ञ करने के अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में इस प्रकार का आयोजन किया जा रहा है, उस परिवार का आर्य समाज के साथ जुड़ना और वेद पारायण यज्ञ करने का संकल्प लेना बहुत ही प्रसन्नता का विषय है। विशेष रूप से तब जबकि युवा वर्ग तेजी से अपने वैदिक संस्कारों से दूर भागता जा रहा है। प्रवीण नागर और उनके जैसे युवा जब आर्य समाज की विचारधारा का प्रचार प्रसार करने का संकल्प लेंगे तो उसका लाभ संगठन को अवश्य ही प्राप्त होगा। यज्ञ प्रचार समिति के जिला अध्यक्ष प्रधान विजेंद्र सिंह का व्याख्यान भी बहुत ही प्रेरक रहा । उन्होंने पाखंड पर करारी चोट करते हुए कहा कि हमारी बहन बेटियों को विज्ञान के युग में पाखंड से दूर रहना चाहिए। सत्य और तर्क तराजू पर टकर ही कोई काम करना चाहिए भावनाओं में बहकर पाखंडी लोगों की बातों में नहीं आना चाहिए। सेवा संस्कार पर ध्यान देना चाहिए और समझना चाहिए कि वह ही राष्ट्र की निर्माता हैं। यदि वे स्वयं पाखंडों में फंसेंगी तो उनकी संतान भी इसी प्रकार के पाखंड और अंधविश्वासों में फंसकर अपने जीवन को बर्बाद कर लेंगी। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य राजदेव ने भी बहुत सुंदर व्याख्यान सामवेद के मंत्रो को लेकर सार रूप में दिया। उन्होंने जीवन को वैदिक संस्कारों में ढालकर सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने की भावना पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संसार की गति को सुधारने के लिए वेद की शरण में जाना ही पड़ेगा। क्योंकि वेद ही मानव को मानव बनाकर उसे प्राणी मात्र के प्रति दयालु बनाता है। धार्मिक बनाता है। ईश्वर भक्त बनाता है। देशभक्त बनाता है। इस अवसर पर ब्रह्म प्रकाश आर्य ,हरस्वरूप आर्य, जिला आर्य उप प्रतिनिधि सभा के उपाध्यक्ष महावीर सिंह आर्य, सचिव महेंद्र सिंह आर्य, विक्रम सिंह आर्य, जयकरण सिंह आर्य, प्रधान बलबीर सिंह आर्य सहित दर्जनों की संख्या में मातृशक्ति और यज्ञ प्रेमी ग्रामवासी उपस्थित रहे।
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