श्रीलंका में गूंजेगा बिहार का साहित्यिक स्वर
इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक, कवयित्री डॉ. उषाकिरण श्रीवास्तव और डॉ. संगीता सागर को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय सम्मान

पटना/कोलंबो।
विश्व हिंदी दिवस (10 जनवरी) के अवसर पर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो भारतीय साहित्य और संस्कृति के रंग में रंगने जा रही है। पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के तत्वावधान में 9 से 13 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले ‘20वें लेखक मिलन शिविर’ में भारत और विशेष रूप से बिहार के साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इस अवसर पर बिहार के प्रतिष्ठित इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक तथा मुजफ्फरपुर की चर्चित कवयित्रियाँ डॉ. उषाकिरण श्रीवास्तव और डॉ. संगीता सागर को उनकी साहित्यिक एवं बौद्धिक उपलब्धियों के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर साहित्य और संस्कृति का संगम
यह पांच दिवसीय भव्य आयोजन स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, कोलनिय विश्वविद्यालय तथा डॉ. अकेलाभाई प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, कवि सम्मेलन, लेखन कार्यशालाएँ और साहित्यिक यात्राएँ आयोजित होंगी, जिनमें भारत सहित विभिन्न देशों के साहित्यकार, शोधकर्ता और रचनाकार भाग लेंगे।

बिहार की सशक्त भागीदारी

बिहार के करपी (अरवल) एवं जहानाबाद से जुड़े इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक को ‘हिंदी: वैश्विक संवाद की भाषा’ विषय पर उनके गहन शोध, अध्ययन और प्रभावशाली व्याख्यान के लिए सम्मानित किया जाएगा। उनका कार्य हिंदी को वैश्विक स्तर पर संवाद और सांस्कृतिक सेतु के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं, मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. उषाकिरण श्रीवास्तव अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार की लोक-संस्कृति की मधुर सुगंध बिखेरेंगी। वे विशेष रूप से ‘बज्जिका लोक गीत’ की प्रस्तुति के माध्यम से लोक भाषाओं और परंपराओं की जीवंतता को रेखांकित करेंगी। साहित्य सृजन में निरंतर सक्रिय डॉ. संगीता सागर को भी उनके काव्यात्मक योगदान और साहित्यिक साधना के लिए विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा जाएगा।
68 साहित्यकारों का होगा सम्मान
पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के सचिव डॉ. अकेलाभाई ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में कुल 68 साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें 34 साहित्यकारों को ‘वैश्विक संवाद की भाषा’ विषय पर उनके योगदान के लिए तथा 34 कवयित्रियों को काव्य-पाठ के लिए सम्मान मिलेगा। इसके साथ ही ‘भारतीय विवाह संस्कार गीत’ और ‘लोक संस्कार गीत: एक अध्ययन’ जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श और शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
भारत–श्रीलंका सांस्कृतिक सेतुयह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा। विशेष रूप से बिहार की लोक परंपराएँ, लोक गीत, और समकालीन हिंदी साहित्य अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त करेंगे। साहित्यिक संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोक-संस्कृति के संरक्षण की दृष्टि से यह लेखक मिलन शिविर दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर सिद्ध होगा।
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