हॉकी भी कायल हुई,जादू भरी अदाओं पर
अलौकिक विलक्षण प्रतिभा ,जीवन वृत्त हॉकी परिभाषा ।
हर गोल विजयी भव पर्याय,
हिय कीर्तिमानी अभिलाषा ।
तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक ,
जग नतमस्तक हिंद फिजाओं पर ।
हॉकी भी कायल हुई,जादू भरी अदाओं पर ।।
हिटलर हो या ब्रैडमैन,
दर्श खेल गुत्थी अनंत नमन ।
सदा शीर्ष राष्ट्र स्वाभिमान,
शोभित सुरभित भारती चमन ।
चार सौ अधिक अनूप गोल ,
स्वर्णिम रंग इतिहास अल्पनाओं पर ।
हॉकी भी कायल हुई,जादू भरी अदाओं पर ।।
अद्भुत क्रीड़ा अठखेलियां,
प्रतिद्वंदी सदैव अचंभित ।
लोभ प्रलोभन भाव परे,
प्रथम देश धरा मान मंडित ।
अवतरण राष्ट्रीय खेल दिवस ,
प्रेरणा ज्योत जन भावनाओं पर ।
हॉकी भी कायल हुई,जादू भरी अदाओं पर ।।
राष्ट्र हृदय पुलकित प्रफुल्लित,
स्मृत कर अनुपम खेल चातुर्य ।
विपक्षी टीम पर चढ़ता रहा,
बुलंद प्रतिभा ओज आतुर्य ।
धन्य धन्य परम हॉकी विजार्ड,
सदा गर्वित छटा तिरंगी कलाओं पर।
हॉकी भी कायल हुई,जादू भरी अदाओं पर ।।
कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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