वाह रे जीवन
---:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र"अणु"
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वाह रे जीवन,
तुमने सीखा दिया सब-
डालकर उलझन।।
लोग मतलब भर,
अब रहने लगे हैं साथ-
मारकर मन।।
फिर वही लोग,
देते हैं सीख पर सीख-
और मुफ्त परवचन।।
मैं देखकर हैरान हूं,
बदलते बात,विचार-व्यवहार-
चाल और चलन।।
कहना कुछ करना कुछ,
पर अपने लिए सच सबकुछ-
सुखद-सुवासित वन।।
मसलकर फूल बोकर शूल
मिटाकर सच्चाई समूल
लगा माथे पर चंदन।।
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वलिदाद, अरवल(बिहार)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
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