(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के नोएडा मंे जेवर मंे इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास करते हुए कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर को राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रनीति समझना चाहिए। दुर्भाग्य से हमारे देश मंे यह गलत परम्परा पड़ गयी है। कोई सड़क बने, अस्पताल बने, उद्योग स्थापित हो तो उसका राजनीतिकरण कर दिया जाता है। नामकरण को लेकर तो विशेष रूप से ऐसा ही होता है। नोएडा के जेवर मंे जो अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने जा रहा है, उससे रोजगार के हजारों अवसर भी पैदा होंगे। उत्तर प्रदेश के लिए तो यह विशेष गौरव की बात है कि यहां पांचवां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन रहा है। प्रदेश में कुल मिलाकर 9 हवाई अड्डे हो जाएंगे। पीएम ने यह ठीक ही कहा कि प्रोजेक्ट अटके नहीं, लटके नहीं और भटकें नहीं। इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि जेवर मंे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण तय समय मंे ही पूरा जाएगा।
गौरतलब है कि 2012 से पहले प्रदेश में लखनऊ और वाराणसी दो ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट थे। पिछले महीने ही प्रधानमंत्री ने कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का लोकार्पण किया था। अयोध्या इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम भी तेजी से चल रहा है। उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत तक यह लोगों के लिए खोल भी दिया जाएगा। अब जेवर एयरपोर्ट की आधारशिला रखी गयी है। बताया जा रहा है कि 2024 में इस एयरपोर्ट की शुरुआत हो जाएगी।
मौजूदा समय की बात करें तो सूबे में आठ एयरपोर्ट्स संचालित हो रहे हैं, जबकि 13 एयरपोर्ट्स और सात एयर स्ट्रिप्स निर्माणाधीन हैं। जिन एयरपोर्ट्स से कमर्शियल फ्लाइट्स उड़ान भर रही हैं उनमें लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर, गोरखपुर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज और गाजियाबाद का हिंडन शामिल है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के मिशन गति शक्ति को धरातल पर उतारने के लिए योगी सरकार संकल्पबद्ध है। यही वजह है कि सड़क से लेकर हवाई यात्रा तक का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट की परियोजना का पहला चरण वर्ष 2024 तक 10,050 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत से पूरा किया जाना है। 1300 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर फैली यह परियोजना प्रति वर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों को अपनी सेवा देगी। पीएमओ ने कहा कि पहले चरण के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का काम पूरा कर लिया गया है। नोएडा में बन रहा एयरपोर्ट, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में दूसरा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा और इससे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दबाव कम होगा। रणनीतिक नजरिये से नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का अलग महत्व होगा और इससे दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के अलावा अलीगढ़, आगरा, फरीदाबाद और पड़ोसी क्षेत्र के लोगों की जरूरतें पूरी होंगी
एयरपोर्ट की खासियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गौतम बुद्ध नगर में योजना और परियोजनाओं की बाढ़ सी आ गई है। एयरपोर्ट के चलते ही चार नए शहर बस रहे हैं। इतना ही नहीं कनेक्टिविटी को लेकर भी खूब चर्चाएं हो रही हैं। कारोबार के लिहाज से एयरपोर्ट को संजीवनी माना जा रहा है।
किसी भी शहर और दिशा से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो, इसका खास ख्याल रखा गया है। यमुना एक्सप्रेसवे से एलिवेटेड सड़क सीधे एयरपोर्ट तक जाएगी। बल्लभगढ़ से बाईपास बनाकर दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इसी तरह ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को भी यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़कर वाहनों को जेवर एयरपोर्ट का रास्ता दिया जाएगा। वेस्ट यूपी के शहरों को सीधे एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की मदद लेकर बुलंदशहर से एक नई सड़क तैयार की जाएगी। दिल्ली वालों की सहूलियत के लिए मयूर विहार से महामाया फ्लाई ओवर तक एलिवेटेड रोड तैयार हो रहा है। जेवर एयरपोर्ट से आईजीआई, दिल्ली को जोड़ने के लिए बनाए जाने वाले स्पेशल मेट्रो कॉरिडोर की लम्बाई करीब 74 किमी होगी। इस कॉरिडोर का रूट भी लगभग तय कर लिया गया है। कॉरिडोर का रूट कई फेज में होगा। जेवर एयरपोर्ट से लेकर नॉलेज पार्क (ग्रेटर नोएडा) तक, नॉलेज पार्क से नोएडा और नोएडा से यमुना बैंक स्टेशन तक एलिवेटेड ट्रैक बनेगा। इसके बाद यमुना बैंक से नई दिल्ली (शिवाजी पार्क) तक अंडरग्राउंड कॉरिडोर तैयार होगा। ग्रेटर नोएडा से जेवर एयरपोर्ट तक पॉड टैक्सी चलाए जाने को भी अथॉरिटी की हरी झंडी मिल चुकी है। ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी में एक पुराना रेलवे स्टेशन है, लेकिन अब यहां मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब तैयार करने की योजना पर काम हो रहा है। इसके लिए 7 गांवों की 478 हेक्टेयर जमीन अधिग्रिहित की जा रही है। जानकारों की मानें तो 80 जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। योजना के तहत यहां रेलवे स्टेशन, मेट्रो ट्रेन और बस अड्डा भी तैयार किया जा रहा है। तीनों ही जगह आने-जाने में यात्रियों को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो। भारी-भरकम सामान लेकर ट्रेन और बस के लिए दौड़ न लगानी पड़े, इसके लिए स्काई वॉक ट्रैवलर बनाने की योजना पर भी काम शुरु हो गया है।
मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब बनने के बाद वेयर हाउसिंग का पूरा सिस्टम विकसित किया जाएगा। वेयर हाउसिंग में 1500 से 2000 करोड़ रुपये का निवेश ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी करेगी। बाकी का पैसा सरकार लगाएगी। सीईओ का कहना है कि ग्रेटर नोएडा शहर की कनेक्टिविटी देश के दूसरे शहरों से कहीं बेहतर है। यहां पर दुबई और सिंगापुर जैसे पोर्ट की तरह इनलैंड कंटेनर डिपो भी बनाया जाएगा। जिसके जरिए कोई भी सामान भारत के किसी भी हिस्से में सिर्फ 15 घंटे में पहुंच जाएगा। ऐसा होने के बाद ट्रांसपोर्ट पर लागत भी कम आएगी। यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे जेवर में बनने वाला एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा। लेकिन इसके साथ ही यहां देश का सबसे बड़ा हवाई जहाजों की मरम्मत करने का वर्कशॉप एमआरओ (मेंटिनेंस रिपेयरिंग एंड ओवरहॉलिंग) हब भी बन रहा है। इसी के चलते जेवर एयरपोर्ट पर 2 नहीं 5 रनवे बनाए जाने का प्रस्ताव पास हुआ है। गौरतलब रहे अभी तक हवाई जहाजों के इंजन की मरम्मत का काम ज्घ्यादातर खासतौर से सिंगापुर, श्रीलंका और दूसरे यूरोपीय देशों में कराया जाता है। लेकिन अब सरकार के इस कदम से एयर एवियशन कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी और आर्थिक बचत भी होगी। जाहिर है यह यूपी और दिल्ली-एनसीआर की तस्वीर बदलने वाला प्रोजेक्ट है, लेकिन इसके साथ ही चार नए शहर बसाने के एक और बड़े प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है। चारों शहर जेवर एयरपोर्ट के नजदीक और यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बसाए जाएंगे। नए शहरों में आवासीय, औद्योगिक, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल जैसी सभी तरह की एक्टिविटी होंगी। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी घटनाओं, स्थानों और पात्रों पर आधारित थीम पर भी एक अलग शहर बसाए जाने की तैयारी चल रही है। इसलिए इसे राजनीति में न घसीटा जाए। (हिफी)
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