विश्व शाकाहार दिवस पर शाकाहारी जीवनशैली अपनाने का संदेश

- हिंसा रहित और सात्विक आहार से ही स्वस्थ, संतुलित एवं करुणामय समाज का निर्माण संभव : ज्योति मांझी
गया। स्थानीय गोल बगीचा स्थित डॉक्टर विवेकानंद पथ में भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में विश्व शाकाहार दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने शाकाहार को केवल भोजन की पद्धति न मानकर इसे स्वास्थ्य, संयम, करुणा, अहिंसा और संतुलित जीवनशैली से जोड़ते हुए समाज में इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, विद्वान, गणमान्य नागरिक एवं शाकाहार समर्थक उपस्थित रहे।
समारोह की मुख्य अतिथि बाराचट्टी की विधायक श्रीमती ज्योति मांझी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को हिंसा रहित शाकाहारी आहार को अपनी जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व शाकाहार दिवस मनाने के उद्देश्य को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे निहित संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए। शाकाहार केवल भोजन का विकल्प नहीं, बल्कि करुणा, संवेदनशीलता और अहिंसा की भावना को मजबूत करने वाली जीवन-पद्धति के रूप में भी देखा जा सकता है।
श्रीमती ज्योति मांझी ने कहा कि आहार के नाम पर होने वाली हिंसा और जीवों के प्रति संवेदनहीनता को कम किए बिना धरती पर स्थायी शांति, सद्भाव और करुणा का वातावरण तैयार करना कठिन है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने भोजन और जीवनशैली के प्रति सजग होकर यह विचार करना चाहिए कि उसके आहार का प्रकृति, जीव-जगत और समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है। उनके अनुसार, शाकाहार के माध्यम से करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा दिया जा सकता है।.jpeg)
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उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की चर्चा हो रही है। ऐसे समय में अहिंसा और करुणा जैसे भारतीय जीवन-मूल्यों को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने स्वास्थ्य, प्रकृति और जीव-जगत के प्रति जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए शाकाहारी जीवनशैली के महत्व को समझें और इसके प्रति समाज में जागरूकता पैदा करें।
समारोह की अध्यक्षता कौटिल्य मंच एवं भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने की। उन्होंने कहा कि आज का युग अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और भौतिकता का युग बनता जा रहा है। व्यक्ति निरंतर आगे बढ़ने की दौड़ में मानसिक तनाव, भय, भ्रम, असंतोष और अहंकार जैसी स्थितियों से जूझ रहा है। ऐसे वातावरण में सात्विक और संतुलित आहार व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि शाकाहार के प्रति समाज में वैज्ञानिक, स्वास्थ्यपरक, नैतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि भोजन का प्रभाव केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की दिनचर्या और जीवन के प्रति दृष्टिकोण पर भी पड़ता है। इसलिए समाज में बच्चों और युवाओं को संतुलित एवं सात्विक भोजन के महत्व से परिचित कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शाकाहार को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि लोग इसके विभिन्न पहलुओं को समझ सकें और अपनी परिस्थितियों तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप स्वस्थ जीवनशैली का चुनाव कर सकें।
इस अवसर पर आचार्य सच्चिदानंद मिश्र, नईकी ने कहा कि भारत की सुदृढ़ नींव हिंसक प्रवृत्तियों पर नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, मानवता, सह-अस्तित्व और जीव मात्र के प्रति करुणा पर आधारित रही है। भारतीय संस्कृति में सात्विक आहार और संयमित जीवन का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक परंपरा में भी शाकाहार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारतीय मनीषा ने सदियों से भोजन को केवल स्वाद और पेट भरने का माध्यम न मानकर शरीर, मन और जीवन के संतुलन से जोड़ा है।
समारोह में दिव्य रश्मि के संपादक डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने शाकाहार के विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि मनुष्य का शरीर मूलतः मांसाहार के लिए बना है—इस धारणा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जीवन-पद्धति में शाकाहार, सात्विकता और अहिंसा की परंपरा अत्यंत प्राचीन रही है। उनके अनुसार, समय के साथ विभिन्न प्रभावों और जीवनशैली में आए बदलावों के कारण अनेक लोगों ने मांसाहार को अपने भोजन का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को अपनी पारंपरिक आहार-संस्कृति, सात्विक जीवनशैली और जीवों के प्रति करुणा की भावना पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
डॉ. मिश्र ने कहा कि भोजन व्यक्ति के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके संबंध में निर्णय केवल स्वाद के आधार पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी के व्यापक संदर्भ में भी लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शाकाहार के संदेश को किसी पर थोपने के बजाय इसके लाभ, भारतीय परंपरा और अहिंसा के मूल्यों के संदर्भ में समाज के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य प्रकृति और जीव-जगत के प्रति संवेदनशील बनेगा तो समाज में करुणा और सह-अस्तित्व की भावना भी मजबूत होगी।
वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक जीवन में खान-पान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में पारंपरिक और संतुलित आहार पद्धतियों पर नए सिरे से चर्चा आवश्यक है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को यह समझाने की जरूरत है कि भोजन का चुनाव केवल फैशन या स्वाद से प्रभावित न हो, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन मूल्यों को ध्यान में रखकर भी किया जाए। समारोह में इस बात पर भी जोर दिया गया कि शाकाहार के संदेश को परिवार, विद्यालय, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने शाकाहार, अहिंसा, करुणा और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर अपने विचार भी साझा किए। आयोजन का उद्देश्य शाकाहारी भोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति में निहित सात्विक जीवन, संयम और जीव मात्र के प्रति संवेदनशीलता के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना बताया गया।
समारोह में डिंपल कुमारी, सीता देवी, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, चंद्रभूषण मिश्रा, डॉ. रविंद्र कुमार, प्रोफेसर सुनील कुमार मिश्र, दिलीप कुमार, शंभू गिरी, नीरज वर्मा, नीरज मिश्रा, कुमारी थे मनीष कुमार, पुतुल कुमारी, चंद्रमौली मिश्रा, कुंदन मिश्रा, अपरीता मिश्रा, मृदुल मिश्रा, अनुपमा मिश्रा, मेघा मिश्रा, बेबी देवी, अजय कुमार, सुनील कुमार, संजय दास, रवि कुमार दास, टिंकू राम, पार्वती देवी, अविनाश कुमार, रंजीत पाठक, पवन मिश्रा, जितेंद्र पाठक, नवीन पांडे, इरशाद आलम, विप्लव कुमार पांडे, सुधीर दास, संजीत पांडे, रामचंद्र यादव, अशोक कुमार एवं प्रिंस कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।समारोह के अंत में वक्ताओं ने कहा कि शाकाहार को लेकर जागरूकता केवल किसी एक दिवस तक सीमित न रहकर निरंतर सामाजिक संवाद का विषय बननी चाहिए। स्वस्थ शरीर, संतुलित मन, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जीव मात्र के प्रति करुणा जैसे मूल्यों को जीवन में स्थान देकर समाज को अधिक मानवीय और सद्भावपूर्ण बनाने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है।
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