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विश्व पशु दिवस पर संगोष्ठी

विश्व पशु दिवस पर संगोष्ठी

​जहानाबाद (बिहार): विश्व पशु दिवस के अवसर पर जहानाबाद में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार सत्येंद्र कुमार पाठक ने पशु कल्याण, उनके अधिकारों और मानव-पशु सह-अस्तित्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर साल 4 अक्टूबर को मनाया जाने वाला यह दिवस बेजुबानों के प्रति करुणा और पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
​सत्येंद्र कुमार पाठक ने बताया कि इस दिवस की शुरुआत 1925 में जर्मन लेखक और पशु कल्याण कार्यकर्ता हेनरिक ज़िम्मरमैन ने की थी। पहला विश्व पशु दिवस 24 मार्च 1925 को बर्लिन में आयोजित हुआ था, जिसमें 5,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे। बाद में 1929 में, पशुओं के संरक्षक संत 'संत फ्रांसिस ऑफ असीसी' के पर्व दिवस के सम्मान में इसकी तिथि बदलकर 4 अक्टूबर कर दी गई। वर्ष 1931 में इटली के फ्लोरेंस में आयोजित पर्यावरणविदों के सम्मेलन में इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली।
विश्व पशु दिवस ने वैश्विक स्तर पर पशु क्रूरता निवारण कानूनों और जैव विविधता संरक्षण को मजबूती दी है। वहीं भारत में, यह दिवस हमारे सांस्कृतिक विचार 'जीव दया' और संवैधानिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51 ए ( जी )) को रेखांकित करता है। यह दिवस आवारा पशुओं के इलाज, टीकाकरण, और 'प्रोजेक्ट टाइगर' जैसी राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं में जन-भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।​कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने यह संदेश दिया कि पृथ्वी पर जीवन का संतुलन केवल मनुष्यों से नहीं, बल्कि प्रकृति और सभी जीव-जंतुओं के संरक्षण से ही संभव है।

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