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दहेज के दानव से मुक्त समाज बनाने का आर्य समाज ने लिया निर्णय : दहेज एक अभिशाप निवारण समिति की संगोष्ठी हुई संपन्न

दहेज के दानव से मुक्त समाज बनाने का आर्य समाज ने लिया निर्णय : दहेज एक अभिशाप निवारण समिति की संगोष्ठी हुई संपन्न

ग्रेटर नोएडा। यहां सेक्टर म्यू में आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान और दहेज एक अभिशाप निवारण समिति के सौजन्य से दहेज के विरुद्ध विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें दहेज के दानव से मुक्त समाज बनाने का आर्य समाज और दहेज एक अभिशाप निवारण समिति ने मिलकर निर्णय लिया। दहेज एक अभिशाप निवारण समिति की अध्यक्षा श्रीमती निर्मल डेढ़ा ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज केसभ्य समाज के लिए यह बहुत ही विचारणीय प्रश्न है कि हमारी बहन बेटियां जलाई जा रही हैं या दहेज रूपी दानव की भेंट चढ़ रही हैं।उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 16 बेटियां दहेज की भेंट चढ़ रही हैं। इस प्रकार एक वर्ष में हजारों की संख्या में बहन बेटियों को इस दानव के द्वारा भस्म कर दिया जाता है। इसलिए समाज को जागना होगा और इस भस्मासुर के विरुद्ध आवाज उठानी होगी। उन्होंने कहा कि संस्कार आधारित शिक्षा समय की आवश्यकता है नारी सशक्तिकरण होना चाहिए और इसके लिए मर्यादाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।
समिति की विधिक सलाहकार श्रीमती सीमा चौधरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बेटियों को समान अधिकार देने की बात तो की जाती है परंतु जब व्यावहारिक रूप में कुछ करने का समय आता है तो लोग मुकर जाते हैं। इस प्रकार मुंह फेरकर निकलने वाले लोगों से हमें सावधान रहना होगा और यथार्थ के धरातल पर कुछ करके दिखाना होगा। इस अवसर पर राजार्य सभा के नेता महेंद्र सिंह आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किये और इस बात पर चिंता व्यक्त की की शादियों में फिजूल खर्ची पर ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वेद विरुद्ध आचरण करने से समाज की व्यवस्था भंग होती जा रही है।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि हमें बातें बनाने के स्थान पर यथार्थ के धरातल पर कुछ करके दिखाना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग दोगली बातें करते हैं, जब बेटी का विवाह आता है तो वह दहेज के विरोधी बन जाते हैं, परंतु जब बेटे का विवाह आता है तो पीछे से दहेज ले लेते हैं। इस प्रकार के लोगों के आचरण का प्रभाव समाज पर सकारात्मक नहीं पड़ता। इसलिए हमको कथनी और करनी में एकता स्थापित करनी होगी। उन्होंने कहा कि आज की बेटियों को भी अपनी भड़कीली ड्रेस पर ध्यान देना चाहिए। इसके अतिरिक्त माता बहनों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब उनकी बेटी दूसरे घर में जाए तो वह संस्कार लेकर जाए। सास ससुर की सेवा का संकल्प लेकर जाए। समाज को नैतिक पतन से बचाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कुछ करने की आवश्यकता है। दहेज निश्चित रूप से एक समस्या है। परंतु दहेज का मूल रूप एक पिता और एक भाई के पवित्र दायित्वों की ओर भी संकेत करता है। जो उन्हें अपनी बहन या अपनी बेटी के लिए जीवन भर कुछ देते रहने के लिए प्रेरित करता है। आज बेटियों को स्वार्थी नहीं होना चाहिए। वे निस्वार्थ होकर माता-पिता और भाई से प्रेम रखें और मायका पक्ष के लोगों को भी जब भी बहन या बेटी को सहायता की आवश्यकता हो तभी सहायता के लिए तैयार रहना चाहिए। यह हमारे पूर्वजों के दिए हुए संस्कार हैं। इनको जीवित रखने की आवश्यकता है। जीवंत बनाए रखना है । इनके बनाए रखने से परिवारों में प्रेम बना रहता है। इसी में दहेज की समस्या का निदान भी संभव है।
इस अवसर पर डॉ अर्जुन छोकर जैसे विचारशील लोगों का भी समागम हुआ। उन्होंने व्यक्तिगत बातचीत में कहा कि आज समाज को जागृत करने की आवश्यकता है। एक तरफ हम कहते हैं कि यह 21वीं सदी विज्ञान की सदी है। दूसरी ओर हम बहन बेटियों पर अमानवीय अत्याचार करते हुए देखे जाते हैं। इस प्रकार के आचरण से असभ्यता स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि समाज में जो कुछ भी हो रहा है, उसमें उन भारत विरोधी शक्तियों का भी योगदान है जो भारत के समाज को विकृत करना चाहती हैं।
सभा का सफल संचालन ब्रह्मचारी आर्य सागर द्वारा किया गया। उन्होंने अपने गंभीर विवेचनात्मक वक्तव्य में कहा कि
दहेज निश्चित रूप से एक भस्मासुर है और हम इसका उपचार भी चाहते हैं परंतु इसके साथ ही साथ हमको इसके मूल कारण पर भी विचार करना होगा। मानव समाज की लोभी प्रवृत्ति को नियंत्रण में लाने के लिए वैदिक मूल्यों का प्रचार प्रसार शिक्षा के माध्यम से आना चाहिए। बेटियों को बेटों के बराबर के अधिकार देकर उन्हें सुसंस्कृत बनाकर और राष्ट्र निर्मात्री बनाकर समाज को सौंपना प्रत्येक गंभीर पिता का दायित्व है। यही गंभीर दायित्व समाज का भी है। समाज अपनी ओर से दहेज के लोभी लोगों का बहिष्कार करे और जो लोग दूसरों की बेटियों को अपनी बेटी समझ कर रखते हैं, उन्हें समाज के लिए आदर्श के रूप में स्वीकृति प्रदान करे।
इस अवसर पर सरपंच रामेश्वर सिंह, देव मुनि जी महाराज, शिव मुनि जी महाराज, रंगीलाल आर्य, प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य ,महावीर सिंह आर्य, बाबूराम आर्य,मास्टर प्रताप सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह आर्य, अनार सिंह आर्य, जीतराम आर्य, रामप्रसाद आर्य, वेदपाल आर्य,कृपाल सिंह आर्य ,मनु देव आर्य, सतीश शास्त्री, प्रधान रविंद्र आर्य, दिवाकर आर्य, जिला प्रतिनिधि सभा के मंत्री पंडित धर्मवीर आर्य, सुभाष आर्य, देवदत्त शर्मा , सचिव महेंद्र सिंह आर्य,चरण सिंह आर्य
यशपाल आर्य, नेत्रपाल आर्य, धर्मेंद्र भाटी, प्रवेश भाटी, रघुराज भाटी, रामे भाटी, रामनिवास आर्य, नेत्रपाल आर्य
आदि सहित सैकड़ो आर्य जन उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में चार परिवारों ने अपने घरों में आयोजित होने वाले विवाहों में दहेज न लेने का संकल्प भी व्यक्त किया। ज्ञात रहे कि इस कार्यक्रम का आयोजन आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुध नगर के महत्वपूर्ण स्तंभ महाशय किशनलाल आर्य जी के विशेष परिश्रम और पुरुषार्थ के चलते संपन्न हुआ। जिन्होंने अपने प्रपौत्र के जन्म दिवस के अवसर पर इस कार्यक्रम का सारा खर्चा वहन किया। महाशय किशन आर्य इस समय 85 वर्ष की अवस्था के हैं। उनका पूरा जीवन आर्य समाज के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने आर्य समाज के सिद्धांतों की रक्षा के लिए जीवन भर काम किया है। यह अत्यंत आनंद का विषय है कि उनके रहते हुए उनकी चौथी पीढ़ी उनसे यह संस्कार प्राप्त कर रही है।
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