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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंकाई प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या से की मुलाकात, विकास सहयोग, शिक्षा, तकनीक और महिला सशक्तीकरण पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

भारत-श्रीलंका साझेदारी को नई गति देने का संकल्प

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंकाई प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या से की मुलाकात, विकास सहयोग, शिक्षा, तकनीक और महिला सशक्तीकरण पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

कोलंबो, 9 सितंबर 2026। भारत और श्रीलंका ने क्षेत्रीय शांति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए अपनी ऐतिहासिक एवं बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कोलंबो में श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता में विकास सहयोग प्रमुख विषय रहा। इसके साथ ही शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, आधारभूत संरचना, नवाचार, अनुसंधान तथा दोनों देशों के बीच जन-जन के संबंधों को और मजबूत करने पर भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और श्रीलंका को साझा विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े दो महत्वपूर्ण पड़ोसी देश बताते हुए कहा कि दोनों देशों को क्षेत्रीय शांति एवं समृद्धि तथा अपने नागरिकों के कल्याण के लिए साझा विकास दृष्टि के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल राजनीतिक अथवा कूटनीतिक संबंधों तक सीमित न रहकर विकास और क्षमता निर्माण के व्यापक क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए।

क्षमता निर्माण को सहयोग का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया

वार्ता के दौरान राजनाथ सिंह ने क्षमता निर्माण को भारत-श्रीलंका सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी श्रीलंका यात्रा से दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक साझेदारी को नई गति मिलेगी और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में ठोस प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा।

भारत और श्रीलंका के संबंधों की विशेषता केवल भौगोलिक निकटता नहीं है। दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी सभ्यतागत, सांस्कृतिक और सामाजिक निकटता रही है। वार्ता में इन प्राचीन सभ्यतागत संबंधों का भी उल्लेख हुआ। दोनों पक्षों ने माना कि मजबूत जन-जन संपर्क दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थायी आधार प्रदान करता है।
शिक्षा और तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर जोर

बैठक में शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, आधारभूत संरचना, नवाचार और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में तकनीकी क्षमता, ज्ञान और मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला हैं। ऐसे में भारत और श्रीलंका के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की ओर से क्षमता निर्माण, शिक्षा और तकनीकी सहयोग के माध्यम से श्रीलंका के विकास में योगदान देने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया गया।

प्रधानमंत्री अमरसूर्या को बताया महिला सशक्तीकरण का प्रतीक

राजनाथ सिंह ने श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या की भूमिका की विशेष सराहना की। उन्होंने उन्हें नारी शक्ति और महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि वह केवल श्रीलंका की महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि श्रीलंका की अधिक से अधिक महिलाएं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की छात्रवृत्तियों तथा भारत सरकार की अन्य पहलों का लाभ उठाएं। इसका उद्देश्य महिलाओं की शिक्षा, नेतृत्व क्षमता और शासन व्यवस्था में उनकी भागीदारी को और बढ़ावा देना है।

रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर यह भी उल्लेख किया कि भारत और श्रीलंका दोनों में ऐसी अनेक सशक्त महिला नेता रही हैं, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
साझा विरासत से साझा भविष्य की ओर

भारत और श्रीलंका के संबंधों की जड़ें इतिहास और संस्कृति में गहरी हैं। बौद्ध परंपरा से लेकर समुद्री संपर्क, व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक दोनों देशों ने सदियों से एक-दूसरे को प्रभावित किया है। आधुनिक समय में यह संबंध विकास साझेदारी, आर्थिक सहयोग, तकनीक, शिक्षा, सुरक्षा और मानवीय सहयोग के व्यापक स्वरूप में बदल चुका है।

ऐसे समय में राजनाथ सिंह और श्रीलंकाई प्रधानमंत्री के बीच हुई यह बैठक दोनों देशों के संबंधों को साझी विकास दृष्टि और क्षेत्रीय समृद्धि से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

भारत का स्पष्ट संदेश है कि पड़ोसी देशों के साथ मजबूत संबंध केवल रणनीतिक हितों का विषय नहीं, बल्कि साझे विकास, सामाजिक प्रगति और आम नागरिकों के बेहतर भविष्य का आधार भी हैं।

राजनाथ सिंह की इस यात्रा से यह संकेत भी स्पष्ट हुआ है कि भारत श्रीलंका के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप और अधिक व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत और श्रीलंका के बीच संबंध इतिहास की विरासत पर खड़े हैं, लेकिन उनकी असली शक्ति भविष्य की साझी संभावनाओं में है। शिक्षा, तकनीक, आधारभूत संरचना, क्षमता निर्माण और महिला नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर दोनों देश न केवल अपने नागरिकों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि की मजबूत नींव भी तैयार कर सकते हैं।

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