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शिक्षक विश्व भाग्य विधाता

शिक्षक विश्व भाग्य विधाता

कुमार महेन्द्र
मृदुल-मधुर निर्मल वाणी,
ज्ञान-सुधा का पावन दान।
अज्ञान-तिमिर हरने वाले,
शिक्षक जग के श्रेष्ठ वरदान।
संस्कारों की सुगंध भरकर,
जीवन में आलोक लाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


निष्काम भाव समर्पित जीवन,
कर्तव्य-निष्ठा अनुपम धाम।
शिष्य-हृदय में दीप जलाकर,
करता ज्ञान-ज्योति अविराम।
सोई प्रतिभा को जगाकर,
नव-सपनों के पंख लगाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


शांति, शील, सद्भाव सिखाता,
सत्य-अहिंसा का व्यवहार।
नैतिकता के बीज रोपकर,
करता मानवता का श्रृंगार।
संस्कृति, मर्यादा, सदाचार से,
श्रेष्ठ मनुज का रूप सजाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


बदल रहा शिक्षा का परिवेश,
नवाचारों की नई उड़ान।
डिजिटल साधन, तकनीकी ज्ञान,
बनते शिक्षा के नव-प्राण।
कृत्रिम बुद्धि, विज्ञान-सृजन से,
ज्ञान-क्षितिज अनंत बनाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


पुस्तक से लेकर डिजिटल पट तक,
ज्ञान-जगत है विस्तृत अपार।
प्रयोगधर्मी शिक्षा देकर,
खोल रहा नव-द्वार हजार।
जिज्ञासा को पंख लगाकर,
हर विद्यार्थी को राह दिखाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


केवल पाठ नहीं, जीवन पढ़ कर,
हर शिष्य को देता पहचान।
कमज़ोरी को शक्ति बनाकर,
देता उसको नव-आत्मज्ञान।
सृजनशीलता, कौशल, चिंतन से,
भविष्य-भवन की नींव उठाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


गाँव-नगर हो, देश-विदेश हो,
ज्ञान-ज्योति का हो विस्तार।
शिक्षा के पावन प्रकाश से,
मिटे अज्ञान का घोर अंधकार।
वंचित जन तक ज्ञान पहुँचाकर,
समता का संसार बसाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


राष्ट्र-प्रेम की ज्योति जलाकर,
कर्तव्य-पथ पर बढ़ना सिखाता।
विविधताओं में एकता का,
मधुर मंत्र मन में बसाता।
चरित्रवान पीढ़ी गढ़कर,
राष्ट्र-भविष्य उज्ज्वल बनाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


विज्ञान बढ़े, तकनीक बढ़े,
बढ़ता जाए ज्ञान-विस्तार।
पर मानवता जीवित रखना,
शिक्षक का सर्वोच्च विचार।
ज्ञान-विवेक, करुणा का दीपक,
जीवन-पथ पर नित्य जलाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


शिष्य सफलता के शिखर चढ़े,
तो गुरु का मन मुस्काता।
उसकी हर उपलब्धि में शिक्षक,
अपना जीवन सफल पाता।
पीढ़ी-पीढ़ी ज्ञान बाँटकर,
मानवता का पाठ पढ़ाता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


शत-शत नमन उन गुरुजनों को,
जिनसे जग में ज्ञान खिला।
उनके तप से मानवता को,
हर युग में उत्थान मिला।
विश्व-शांति, नव-सृजन, प्रगति का,
सुंदर स्वप्न जग में बोता।
शिक्षक विश्व भाग्य विधाता।।


कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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