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पत्नी बिना पुरुष

पत्नी बिना पुरुष

भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र"अणु"

पत्नी बिना पुरुष का जीवन,
हो जाता बिना प्राण का देह।
हसी खुशी छिन जाती सब -
रह जाता एकांत मधुर स्नेह।।
मन की पीड़ा किससे बांटू -
कहीं कुछ समझ न आता है।
सुनी सुनी धरती लगती यह -
अम्बर भी आंसू ढरकाता है।।
विधुर जीवन एक उपन्यास है
जिसमे अनंत कथा बहती है।
घुट घुट कर जीवन चलता है,
मन में असीम व्यथा रहती है।।

वलिदाद अरवल (बिहार)
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