रैयाम और सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों के स्थापना कार्य को तय समय-सीमा में पूरा करें: सहकारिता मंत्री श्री राम कृपाल यादव

- माननीय मंत्री, सहकारिता विभाग श्री राम कृपाल यादव ने की चीनी मिल परियोजनाओं की समीक्षा; 27,980 किसानों ने सहकारी समितियों की सदस्यता के लिए किया ऑनलाइन आवेदन
पटना, 01 सितंबर 2026।
बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित कर गन्ना किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि-आधारित उद्योगों को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। सात निश्चय-3 के अंतर्गत “समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार” के लक्ष्य के तहत दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की दिशा में चल रही तैयारियों की आज माननीय सहकारिता मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने उच्चस्तरीय समीक्षा की।
समीक्षा बैठक में दोनों प्रस्तावित चीनी मिलों की स्थापना, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), वित्तीय प्रावधान, किसान सदस्यता अभियान, इंडियन पोटाश लिमिटेड के साथ प्रस्तावित समझौता ज्ञापन तथा परियोजना के आगामी चरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। माननीय मंत्री ने सभी संबंधित कार्यों को समयबद्ध एवं समन्वित तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
बंद चीनी मिलों की भूमि पर अत्याधुनिक नई सहकारी मिलें
विदित है कि राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा रैयाम एवं सकरी में बंद चीनी मिलों की भूमि पर नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना का निर्णय लिया गया है। दोनों परियोजनाओं के लिए संभाव्यता प्रतिवेदन एवं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कराने की स्वीकृति प्राप्त है तथा इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के माध्यम से नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन को भी स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।
प्रस्तावित परियोजनाएं केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं होंगी, बल्कि इन्हें एकीकृत कृषि-आधारित औद्योगिक मॉडल के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
MOU एवं परियोजना क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा
बैठक में IPL के साथ प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MOU) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। MOU का प्रारूप तैयार कर माननीय विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त हो चुका है तथा अनुमोदित प्रारूप IPL को सहमति के लिए भेजा जा चुका है। इसके साथ ही रैयाम एवं सकरी चीनी मिलों की भूमि को प्रस्तावित रूप से IPL को 30 वर्षों की लीज पर हस्तांतरित किए जाने से संबंधित प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
852.43 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत
दोनों नई सहकारी चीनी मिलों की प्रस्तावित कुल परियोजना लागत लगभग ₹852.43 करोड़ रुपये है। इसमें रैयाम परियोजना की अनुमानित लागत ₹504.67 करोड़ रुपये तथा सकरी परियोजना की अनुमानित लागत ₹347.76 करोड़ रुपये है। इस परियोजना में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ गन्ना उत्पादन, कृषि सेवाओं, परिवहन तथा स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी गति मिलेगी।
सहकारिता के केंद्र में किसान
माननीय मंत्री ने समीक्षा के दौरान कहा कि दोनों चीनी मिल परियोजनाओं की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार किसानों की सक्रिय भागीदारी है। इसी उद्देश्य से रैयाम एवं सकरी के कमांड एरिया में प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है। राज्य सरकार की यह पहल सहकारिता, कृषि और उद्योग—तीनों को एक साथ जोड़ते हुए किसान-केंद्रित विकास मॉडल को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। किसानों की भागीदारी के प्रति उत्साह का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रैयाम कमांड एरिया से 12,264 और सकरी कमांड एरिया से 15,716, कुल 27,980 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदनों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
किसानों को गन्ने से लेकर वित्त तक मिलेगा सहकारी सहयोग
प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियां किसानों को संबंधित चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति की सुविधा देने के साथ-साथ उन्नत गन्ना बीज, कृषि आदान, तकनीकी सहायता, मिट्टी जांच, प्रशिक्षण एवं जागरूकता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए गांव-वार गन्ना क्षेत्र के आकलन एवं क्षेत्र विस्तार की योजना पर भी काम किया जाएगा।
किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के लिए सहकारी बैंकों के साथ समन्वय किया जाएगा। साथ ही, कृषि यंत्रीकरण और Custom Hiring Centre के माध्यम से किसानों को कृषि मशीनरी एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
बैठक में श्री धर्मेंद्र सिंह, सचिव, सहकारिता विभाग, श्री रजनीश कुमार सिंह, निबंधक, सहयोग समितियाँ एवं श्री विकास कुमार बारियार, अपर निबंधक (न्यायिक), सहयोग समितियाँ सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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