जय मुरलीधर

जय मुरलीधर

जय मुरलीधर
दुःख हर _हर।
सारे कष्ट
मुसीबत दूर कर।
भक्तों में खुशियां
आनंद भर।
सृष्टि का संचार कर
दुखियों को दे वर।
कृष्ण की पत्नी हैं रुक्मणि
प्रेमी हैं राधा।
इसलिए संसार में
नहीं होती बाधा।
आपके मित्र हैं सुदामा ,
पिता हैं वसुदेव।
आप हमारे हैं पूजनीय और आराध्यदेव।
आप हैं सर्वव्यापी
आप बसते हैं कण _कण।
सारे जगत में हैं आदरणीय
आपको मेरा सादर नमन।
दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)
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