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पं. श्याम मिश्र के असामयिक निधन से गया में शोक की लहर

पं. श्याम मिश्र के असामयिक निधन से गया में शोक की लहर

  • सामाजिक सरोकारों के प्रहरी को नम आंखों से श्रद्धांजलि-शोकसभा में उमड़ा जनसमुदाय, वक्ताओं ने कहा- परिवार ही नहीं, समाज ने खोया अपना आत्मीय और सक्रिय साथी

गया। सामाजिक जीवन में अपनी सहजता, विनम्रता, मधुर व्यवहार और सक्रिय भागीदारी से अलग पहचान बनाने वाले स्वर्गीय पंडित श्याम जी मिश्र के असामयिक निधन से गया का सामाजिक एवं बौद्धिक परिवेश शोकाकुल है। उनके निधन के उपलक्ष्य में स्थानीय डॉक्टर विवेकानंद पथ, गोल गोलबगीचा स्थित डॉ. विवेकानंद मिश्र के आवास पर एक भावपूर्ण शोकसभा का आयोजन किया गया। शोकसभा में विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों, समाजसेवियों, शुभचिंतकों और गणमान्य नागरिकों ने उपस्थित होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके व्यक्तित्व और सामाजिक योगदान को स्मरण किया।

शोकसभा में वातावरण अत्यंत भावुक रहा। जिन लोगों ने पंडित श्याम मिश्र को निकट से जाना था, उन्होंने उनके व्यक्तित्व की सरलता, व्यवहार की आत्मीयता और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए कहा कि उनका असमय चले जाना एक ऐसी रिक्तता पैदा कर गया है, जिसकी भरपाई सहज संभव नहीं है। वे सामाजिक जीवन में सक्रिय रहने के साथ-साथ लोगों के सुख-दुःख में सहभागी बनने वाले व्यक्ति थे। यही कारण है कि उनके निधन की खबर से परिवार के साथ-साथ मित्रों, परिचितों और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय लोगों के बीच भी गहरा शोक व्याप्त है।

पंडित श्याम जी मिश्र का संबंध एक गौरवशाली पारिवारिक एवं सामाजिक परंपरा से रहा। वे प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय राजेश्वर मिश्रा, जिन्हें लोग स्नेह और सम्मान से ‘राजो जी’ के नाम से जानते थे, के पुत्र एवं स्वर्गीय पंडित शारदा मिश्र के पौत्र थे। उनके परिवार की पहचान सामाजिक चेतना और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी रही है। उनके पिता स्वर्गीय पंडित शारदा मिश्र गया जिले के टिकारी प्रखंड अंतर्गत मखपा ग्राम के निवासी थे और अपने समय के प्रसिद्ध पहलवानों में गिने जाते थे।

पंडित शारदा मिश्र ने अपनी पहलवानी प्रतिभा से न केवल अपने क्षेत्र और बिहार का नाम रोशन किया, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। उनकी कुश्ती और शारीरिक क्षमता की ख्याति दूर-दूर तक थी। विभिन्न राजाओं एवं प्रतिष्ठित लोगों द्वारा उन्हें अनेक अवसरों पर सम्मानित और पुरस्कृत किया गया। इस प्रकार श्याम मिश्र का पारिवारिक परिवेश पराक्रम, प्रतिष्ठा, सामाजिक सम्मान और जनसेवा की परंपरा से समृद्ध रहा।

इसी विरासत को पंडित श्याम मिश्र ने अपने सामाजिक जीवन में अपने ढंग से आगे बढ़ाया। गया शहर में एसएसपी आवास के ठीक सामने बाली रोड स्थित उनका आवास लंबे समय से सामाजिक संपर्क का एक परिचित केंद्र रहा। समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से उनका आत्मीय संबंध था। वे सहजता से लोगों से मिलते थे और अपने मधुर व्यवहार से शीघ्र ही अपनापन स्थापित कर लेते थे।

पंडित श्याम मिश्र विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा तथा कौटिल्य मंच में वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में उन्होंने सामाजिक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाई। समाज को संगठित रखने, सामाजिक विषयों पर संवाद कायम करने और आवश्यकता पड़ने पर लोगों के साथ खड़े रहने की उनकी प्रवृत्ति ने उन्हें अपने साथियों के बीच विशिष्ट स्थान दिलाया।
‘श्याम मिश्र का जाना व्यक्तिगत ही नहीं, सामाजिक क्षति’

शोकसभा को संबोधित करते हुए डॉ. विवेकानंद मिश्र ने स्वर्गीय पंडित श्याम मिश्र के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि श्याम मिश्र जी का असामयिक निधन परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक है, लेकिन उनकी कमी का अनुभव पूरा समाज भी करेगा। उन्होंने कहा कि श्याम मिश्र जी सरल स्वभाव, विनम्रता, मधुरभाषिता, व्यवहारिक कुशलता और सामाजिक सक्रियता के लिए जाने जाते थे।

डॉ. विवेकानंद मिश्र ने भावुक होकर कहा कि श्याम मिश्र जी से उनका संबंध केवल सामाजिक परिचय तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके निधन को वे अपनी व्यक्तिगत क्षति के रूप में भी देखते हैं। उनके अनुसार, समाज में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो बिना किसी दिखावे के लगातार लोगों के बीच बने रहते हैं और अपने व्यवहार से संबंधों को मजबूत करते हैं। पंडित श्याम मिश्र उन्हीं लोगों में से एक थे।

उन्होंने कहा कि श्याम मिश्र जी का निधन ऐसी सामाजिक रिक्तता छोड़ गया है, जिसकी पूर्ति दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती। उन्होंने अश्रुपूर्ण आंखों से दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने जताया गहरा दुःख

शोकसभा में आचार्य सच्चिदानंद मिश्र (नैकी) ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्वर्गीय पंडित श्याम मिश्र के व्यक्तित्व और सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए उनके असामयिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के सक्रिय और आत्मीय व्यक्तित्व का इस प्रकार अचानक चले जाना अत्यंत कष्टदायक है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को धैर्य प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

शोकसभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि किसी व्यक्ति का वास्तविक जीवन-मूल्य उसके पीछे छूट जाने वाली स्मृतियों और लोगों के जीवन में उसके द्वारा छोड़े गए प्रभाव से तय होता है। इस दृष्टि से पंडित श्याम मिश्र की स्मृतियां उनके परिजनों, मित्रों, सामाजिक साथियों और शुभचिंतकों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेंगी।
दो मिनट का मौन, नम आंखों से दी अंतिम श्रद्धांजलि

शोकसभा के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण किया। उपस्थित लोगों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे स्वर्गीय पंडित श्याम मिश्र को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके शोकाकुल परिवार और बड़ी संख्या में मौजूद शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति एवं धैर्य प्रदान करें।

शोकसभा में बाराचट्टी विधायक ज्योति मांझी, भारतीय जन क्रांति दल के राष्ट्रीय महासचिव राकेश दत्त मिश्रा, विजय बाबू गायब, आचार्य सुनील कुमार पाठक, संदीप मिश्र, अमरनाथ पांडे, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, संदीप पाठक, विक्रम कुमार मिश्र, अमरनाथ मिश्र, दीपक पाठक, अजय मिश्रा, रंजीत पाठक, पवन मिश्रा, सुरेंद्र उपाध्याय, उत्तम पाठक, चंद्रमौली कुमार मिश्र, मनीष मिश्र, किरण पाठक, रंजना पांडे, सतेंद्र कुमार मिश्र, कुंदन मिश्रा, रोहित पाठक, शंभू गिरी, दिलीप कुमार, चंद्रमौली मिश्रा, नीरज वर्मा, प्रियांशु मिश्र, नीलम कुमारी, सोनी मिश्रा, रणजीत मिश्रा, नीरज मिश्रा, गौरी शंकर मिश्रा, शंभू लाल गुर्दा, डॉ. गोपी मिश्र, केके पाठक, मृदुला मिश्रा, विनय कुमार शर्मा, मनीष कुमार, डिंपल कुमारी, अनुपम, मेघा मिश्रा, पुष्पा, पार्वती देवी सहित अनेक गणमान्य लोग एवं शुभचिंतक उपस्थित रहे।

शोकसभा में उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में दिवंगत पंडित श्याम मिश्र के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका सरल व्यक्तित्व, आत्मीय व्यवहार और समाज के प्रति समर्पण सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।ॐ शांति।
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