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साहित्य जगत ने नम आंखों से याद किए जगदीश मित्तल

साहित्य जगत ने नम आंखों से याद किए जगदीश मित्तल

  • ब्रह्मपुर धाम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने कहा-उनका निधन हिंदी काव्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति

रिपोर्ट : डॉ. अनमोल कुमार
ब्रह्मपुर/बक्सर। राष्ट्रीय कवि संगम के यशस्वी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हिंदी साहित्य तथा काव्य जगत के समर्पित साधक स्वर्गीय जगदीश मित्तल जी की पावन स्मृति में ब्रह्मपुर धाम स्थित गौरीशंकर पब्लिक स्कूल के प्रांगण में भावपूर्ण एवं गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रचेतना और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों की उपस्थिति में आयोजित इस सभा में स्वर्गीय मित्तल जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष रतनेश ओझा 'राही' ने की। कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय जगदीश मित्तल जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा दो मिनट का मौन रखकर की गई। जैसे ही उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए, पूरा वातावरण भावुक हो उठा। साहित्यकारों, कवियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने उन्हें स्मरण करते हुए उनके साहित्यिक एवं सांगठनिक योगदान को नमन किया।

साहित्य और राष्ट्रचेतना के लिए समर्पित रहा जीवन

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि स्वर्गीय जगदीश मित्तल जी का निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि साहित्य और काव्य जगत के लिए एक ऐसी रिक्तता का उत्पन्न होना है, जिसकी भरपाई सहज संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मित्तल जी ने राष्ट्रीय कवि संगम को केवल एक साहित्यिक संगठन के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे देशभर के कवियों और साहित्यकारों को जोड़ने वाले एक व्यापक सांस्कृतिक मंच के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में साहित्य और कविता के क्षेत्र में काम कर रही प्रतिभाओं को पहचान दिलाने तथा उन्हें मंच उपलब्ध कराने में जगदीश मित्तल जी का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने अपनी सक्रियता के माध्यम से अनेक रचनाकारों को आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनका जीवन मां भारती की सेवा, हिंदी भाषा के सम्मान और साहित्य के उत्थान के प्रति समर्पित रहा।

आचार्य धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि स्वर्गीय मित्तल जी के कार्यों और विचारों को केवल स्मृतियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाते हुए साहित्य और राष्ट्रचेतना के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई जाए।

कवियों के लिए अभिभावक जैसी थी उनकी भूमिका


सभा की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष रतनेश ओझा 'राही' ने स्वर्गीय जगदीश मित्तल को स्मरण करते हुए कहा कि वे केवल एक कुशल संगठनकर्ता नहीं थे, बल्कि देशभर के कवियों और साहित्यकारों के लिए अभिभावक की भूमिका निभाते थे।

उन्होंने कहा कि मित्तल जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे साहित्य को समाज और राष्ट्र से जोड़कर देखते थे। उनके मार्गदर्शन में अनेक कवियों को अपनी प्रतिभा को निखारने और उसे व्यापक मंच तक पहुंचाने का अवसर मिला। उनका व्यक्तित्व सहज, आत्मीय और प्रेरणादायी था।

रतनेश ओझा 'राही' ने कहा कि स्वर्गीय मित्तल जी का मार्गदर्शन और उनकी कार्यशैली आने वाली पीढ़ियों के साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनके विचार हमें साहित्य-साधना के साथ राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देते रहेंगे।

सांगठनिक कौशल और राष्ट्र-निर्माण में योगदान को किया याद

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित भोजपुर विभाग के सेवा प्रमुख श्री शिवजी पाण्डेय, दक्षिण दिल्ली के पूर्णकालिक धर्म जागरण समन्वयक श्री जितेंद्र तिवारी तथा श्री सतेंद्र मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं ने स्वर्गीय जगदीश मित्तल जी के सांगठनिक कौशल, साहित्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा राष्ट्र-निर्माण से जुड़े उनके विचारों को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि मित्तल जी ने साहित्य को केवल मनोरंजन या अभिव्यक्ति का माध्यम न मानकर समाज में सकारात्मक चेतना जागृत करने का माध्यम बनाया। उन्होंने साहित्यकारों को सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकारों से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य किया।

काव्य-पुष्पांजलि से भावुक हुआ वातावरण

श्रद्धांजलि सभा का सबसे भावुक क्षण उस समय आया जब उपस्थित कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से स्वर्गीय जगदीश मित्तल को काव्य-पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रख्यात कवि सतेंद्र पाठक 'बवाली' तथा साहित्य कवि रामनिवास वर्मा 'शिशिर' ने अपनी मर्मस्पर्शी एवं संस्मरणात्मक पंक्तियों के माध्यम से स्वर्गीय मित्तल जी के व्यक्तित्व को याद किया। उनकी कविताओं में श्रद्धा, स्मृति, पीड़ा और साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। काव्य-पाठ के दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण भाव-विभोर हो उठा।

कवियों ने कहा कि किसी साहित्यकार का वास्तविक जीवन उसकी रचनाओं, उसके विचारों और उसके द्वारा तैयार की गई अगली पीढ़ी में जीवित रहता है। इस दृष्टि से जगदीश मित्तल जी की साहित्यिक एवं सांगठनिक विरासत लंबे समय तक समाज को प्रेरित करती रहेगी।

साहित्य प्रेमियों की रही व्यापक भागीदारी

कार्यक्रम में तुलसी विचार मंच के संयोजक श्री शैलेश कुमार ओझा, प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता श्री नित्यानंद ओझा, श्री प्रदीप दुबे सहित अनेक स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद, साहित्यकार, कवि एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

सभा में उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय जगदीश मित्तल जी के जीवन और कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान केवल राष्ट्रीय कवि संगम तक सीमित नहीं था। उन्होंने साहित्यकारों के बीच संवाद, संगठन और रचनात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का निरंतर प्रयास किया। उनकी सक्रियता ने अनेक रचनाकारों को मंच और दिशा प्रदान की।
अधूरे कार्यों को पूरा करने का लिया संकल्प

श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि स्वर्गीय जगदीश मित्तल जी के साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय कवि संगम की मूल भावना, साहित्य के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्रहित से जुड़े विचारों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किया जाएगा।

वक्ताओं ने कहा कि किसी महान व्यक्तित्व को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करना नहीं, बल्कि उनके जीवन-मूल्यों को अपने आचरण में उतारना और उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना है। जगदीश मित्तल जी ने जिस साहित्यिक चेतना और संगठनात्मक भावना के साथ कार्य किया, उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति एवं मोक्ष के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। साथ ही शोकाकुल परिवार एवं उनके आत्मीयजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की गई।

श्रद्धांजलि सभा ने यह संदेश दिया कि शरीर भले ही नश्वर है, लेकिन साहित्य, विचार और संस्कारों के माध्यम से किसी कर्मयोगी का जीवन सदैव जीवित रहता है। स्वर्गीय जगदीश मित्तल जी की साहित्य-साधना और राष्ट्रचेतना की विरासत भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ बनी रहेगी।

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