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लालगुड़हल और श्री गणेश का संबंध : गणेशपूजन में लाल गुड़हल क्यों चढ़ाया जाता है? अध्यात्मशास्त्र क्या कहता है?

लालगुड़हल और श्री गणेश का संबंध : गणेशपूजन में लाल गुड़हल क्यों चढ़ाया जाता है? अध्यात्मशास्त्र क्या कहता है?

क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदू धर्म की पारंपरिक पूजा-विधियों में किसी विशेष देवता को विशेष वस्तुही अर्पित करने का नियम क्यों होता है? आधुनिक संस्कृति में फूलों का चयन भले ही केवल व्यक्तिगत पसंद या सुंदरता का विषय माना जाता हो, लेकिन अध्यात्मशास्त्र में प्राचीन काल से यह माना जाता रहा है कि प्रत्येक घटक में एक विशिष्ट सूक्ष्म ऊर्जा होती है। गोवा स्थित 'महर्षिअध्यात्म विश्वविद्यालय' केशोधकर्ताओं ने जब इन पारंपरिक पद्धतियों का परीक्षण किया,तो यह निष्कर्ष निकला कि फूलों के चयन से आसपास के वातावरण की ऊर्जा में उल्लेखनीय बदलावआता है ।

इस अध्ययन में शोध दल ने एक मूलभूत प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास किया: 'पूजा के दौरान विभिन्न प्रकार के फूल अर्पित करने पर आसपास के वातावरण की ऊर्जा में क्याबदलाव आता है? 'मानव संवेदनाओं (इंद्रियों) से परे होने वाले बदलावों को दर्ज करने के लिए शोधकर्ताओं ने 'पॉलीकॉन्ट्रास्ट इंटरफेरेंसफोटोग्राफी' (PIP) तकनीक का उपयोग किया। यह तकनीक किसी वस्तु या व्यक्ति के चारों ओर मौजूद अदृश्य ऊर्जा, यानीआभामंडल (Aura) को पकड़कर उसे दृश्य रंगों में परिवर्तित करती है। इस अध्ययन में श्री गणेश के चित्र पर विभिन्न फूल अर्पित करने के बाद आसपास के वातावरण की ऊर्जा में होने वाले परिवर्तनोंका अध्ययन किया गया।

सबसे पहले,श्रीगणेश के चित्र के सामने कोई भी फूल रखने से पूर्व,कमरे में चित्र के आसपास के वातावरण की प्रारंभिक (Baseline)रीडिंग ली गई। इसके बाद, श्रीगणेश के चित्र को पहले एक लाल गुलाब और फिर एक गुलाबी गुड़हल अर्पित किया गया। इन दोनों फूलों के कारण प्रारंभिक रीडिंग की तुलना में आसपास की सकारात्मक ऊर्जा में थोड़ी कमी देखी गई। हालाँकि, जबपारंपरिक लाल गुड़हल का फूल अर्पित किया गया,तोवातावरण की सकारात्मक ऊर्जा में उल्लेखनीय वृद्धि होना स्पष्ट दिखा

निष्कर्ष:-अन्य दोनों फूलों की तुलना में लाल गुड़हल में गणेशतत्त्व को आकर्षित कर उसे वातावरणमें प्रक्षेपित (फैलाने) करने की क्षमता अधिक होती है। इसलिए,श्रीगणेश के चित्र पर लाल गुड़हल चढ़ाने से वातावरण में सकारात्मक स्पंदनों (Vibrations)मेंअत्यधिक वृद्धि देखी गई।शोध दल के अनुसार,येनिष्कर्ष अध्यात्मशास्त्र के उस मूलभूत सिद्धांत की पुष्टि करते हैं कि वनस्पतियोंके विशिष्ट घटक किसी निश्चित देवता के स्पंदनों को आकर्षित और प्रक्षेपित करने मेंसक्षम होते हैं। इसके अनुसार, लाल गुड़हल एक प्राकृतिक 'एंटीना' कीतरह कार्य करता है; जो श्री गणेशतत्त्व को आकर्षित कर उसे आसपास के वातावरण में प्रसारित करने के लिए विशेषरूप से अनुकूल है । इसलिए,अगली बार श्री गणेश को फूल अर्पित करते समय, किसी भी अन्य फूल की तुलना में लाल गुड़हल का फूल ही अर्पित करें ! शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि 'हिंदूधर्म की पारंपरिक पद्धतियों के पीछे व्यावहारिक और गहरा विज्ञान है।' इसके पीछे की सूक्ष्म कार्यप्रणाली को समझकर, हम अपनी दैनिक पूजा-विधियों से अधिक से अधिक सकारात्मक स्पंदन प्राप्त कर सकते हैं।

श्रीमती मधुरा धनंजय कर्वे, महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा

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