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क्षणभंगुर जिंदगी

क्षणभंगुर जिंदगी

जय प्रकाश कुवंर
जिंदगी पर इतना क्यों इतरा रहे हो यारों,
ना समझ हो, इसमें गलती नहीं तुम्हारी है,
पीपल के पत्तों जैसी जिन्दगी हमारी है।
पेड़ पर कल हरे थे, फिर पीले हुए,
फिर सुख गए और, अब झड़ने की तैयारी है।।
हरे, पीले, सुखे, जब तक डाल पर हो,
सबको छांव का सुख देते जाओ मेरे यार।
सुख कर डाल से गिरते ही मिट जाओगे,
फिर किसी को नहीं दे सकोगे छांव का प्यार।।
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