स्वरा भास्कर को हिंदू विधिज्ञ परिषद का कानूनी नोटिस

- ‘जौहर’ को कथित रूप से कायरता बताने पर 25 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग, सार्वजनिक माफी और बयान वापस लेने की मांग
मुंबई, 9 सितंबर 2026।
अभिनेत्री स्वरा भास्कर अहमद को हिंदू विधिज्ञ परिषद की ओर से ‘जौहर’ से संबंधित कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर कानूनी नोटिस भेजे जाने का मामला सामने आया है। परिषद ने आरोप लगाया है कि 31 अगस्त को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री ने हिंदी फिल्म पद्मावत में प्रदर्शित ‘जौहर’ के प्रसंग का उल्लेख करते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिससे हिंदू समाज, विशेषकर राजपूत समाज की धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक भावनाएं आहत हुई हैं।
हिंदू विधिज्ञ परिषद की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नोटिस में स्वरा भास्कर से 25 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है। इसके साथ ही कथित आपत्तिजनक वक्तव्य को वापस लेने, संबंधित वीडियो, संदेश, रील्स अथवा अन्य डिजिटल सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने तथा भविष्य में हिंदू धर्म, उसकी परंपराओं और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के संबंध में अपमानजनक टिप्पणी नहीं करने का लिखित आश्वासन देने की मांग की गई है।
‘जौहर’ को लेकर टिप्पणी पर आपत्ति
परिषद का कहना है कि महारानी पद्मावती सहित इतिहास में वर्णित अनेक राजपूत महिलाओं द्वारा किए गए ‘जौहर’ को केवल आधुनिक राजनीतिक या सामाजिक दृष्टिकोण से देखना उस ऐतिहासिक प्रसंग की तत्कालीन परिस्थितियों, महिलाओं की सामाजिक स्थिति तथा उनके आत्मसम्मान और अस्मिता से जुड़े दृष्टिकोण की उपेक्षा करना है।
परिषद ने अपने नोटिस में कथित टिप्पणी को ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपमानजनक बताया है। परिषद का दावा है कि ‘जौहर’ की ऐतिहासिक व्याख्या को लेकर मतभेद हो सकते हैं और किसी भी व्यक्ति को इतिहास की आलोचनात्मक समीक्षा करने का अधिकार है, लेकिन आलोचना और किसी समुदाय की श्रद्धा एवं ऐतिहासिक स्मृतियों का कथित अपमान—इन दोनों के बीच अंतर किया जाना आवश्यक है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी उठाया सवाल
कानूनी नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह स्वतंत्रता पूर्ण या असीमित नहीं है। नोटिस के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 19(2) में सार्वजनिक व्यवस्था, शिष्टाचार, नैतिकता तथा अन्य निर्दिष्ट आधारों पर युक्तिसंगत प्रतिबंधों का प्रावधान है।
हिंदू विधिज्ञ परिषद का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की मूल भावना है, लेकिन सार्वजनिक व्यक्तित्वों द्वारा किसी धर्म, समुदाय अथवा ऐतिहासिक-सांस्कृतिक प्रतीकों के संबंध में टिप्पणी करते समय संवैधानिक सीमाओं और सामाजिक संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
25 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और सार्वजनिक माफी की मांग
परिषद की ओर से अधिवक्ता अनेश परलकर द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में कथित बयान को लेकर 25 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त अभिनेत्री से संबंधित कथित सामग्री को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने तथा सार्वजनिक रूप से अपना बयान वापस लेने की मांग की गई है।
नोटिस में यह भी मांग की गई है कि स्वरा भास्कर हिंदू समाज तथा विशेष रूप से राजपूत समाज की महिलाओं से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें और भविष्य में हिंदू धर्म, परंपराओं तथा ऐतिहासिक महापुरुषों एवं महिलाओं के संबंध में ऐसी टिप्पणी न करने का लिखित आश्वासन दें, जिसे परिषद आपत्तिजनक मानती है।
अधिवक्ता अनेश परलकर ने क्या कहा?
हिंदू विधिज्ञ परिषद के अधिवक्ता अनेश परलकर ने कहा कि कथित वक्तव्य से महारानी पद्मावती तथा जौहर से जुड़ी ऐतिहासिक वीरांगनाओं के शौर्य, त्याग और स्वाभिमान का अनादर हुआ है। उनके अनुसार, इस प्रकार की टिप्पणी से उन लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं जो इन ऐतिहासिक प्रसंगों को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानते हैं।
उन्होंने कहा कि परिषद का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को समाप्त करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक विमर्श में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता सुनिश्चित करना है। उन्होंने मांग की कि संबंधित बयान को तत्काल वापस लिया जाए और सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी जाए।
सात दिनों का समय
नोटिस के अनुसार, स्वरा भास्कर को मांगों के अनुपालन के लिए नोटिस प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर जवाब देने और आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर दिया गया है।
परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में कथित रूप से अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए, तो उसके द्वारा संबंधित अभिनेत्री के विरुद्ध उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं। इनमें आपराधिक शिकायत तथा दीवानी कार्यवाही शुरू करने की प्रक्रिया शामिल होने की बात कही गई है।
ऐतिहासिक स्मृतियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच बहस
यह विवाद एक व्यापक सामाजिक और संवैधानिक बहस को भी सामने लाता है—क्या ऐतिहासिक घटनाओं और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं की आलोचना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आती है और यदि आती है, तो उसकी सीमाएं क्या हैं?
एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक समाज की महत्वपूर्ण आधारशिला है, वहीं दूसरी ओर भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीकों से जुड़े विषय अत्यंत संवेदनशील होते हैं। ऐसे मामलों में किसी टिप्पणी की वास्तविक प्रकृति, उसका संदर्भ, कथित वक्तव्य का पूरा रिकॉर्ड और लागू कानूनों के प्रावधान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हिंदू विधिज्ञ परिषद का कहना है कि वह इस मामले को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाएगी और यदि उसकी मांगों पर निर्धारित समय में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
यह पूरा विवाद अब स्वरा भास्कर की ओर से दिए जाने वाले जवाब और आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
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