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हिन्दी हमारी भाषा ही नहीं अस्मिता की पहचान : प्रमोद चंद्रवशी

हिन्दी हमारी भाषा ही नहीं अस्मिता की पहचान : प्रमोद चंद्रवशी

  • साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ हिन्दी-दिवस-समारोह, १४ हिन्दी सेवियों को किया गया सम्मानित


पटना, १४ सितम्बर। हिन्दी हमारी भाषा ही नहीं, हमारी अस्मिता की पहचान और संस्कृति-उन्नायक है। हिन्दी ही भारत की सांस्कृतिक और आत्मिक एकता सुनिश्चित करेगी। यह भारत की जन-जन की भाषा है। हिन्दी का अर्थ अपनापन है, संस्कृति है, संस्कार है।


यह बातें सोमवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित हिन्दी-दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए, बिहार के कला एवं संस्कृति-मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कही। उन्होंने कहा कि दक्षिण में केवल राजनैतिक कारणों से हिन्दी का विरोध है। वहाँ के आम जन हिन्दी से बैर नहीं प्रेम रखते हैं। हमें विश्वास है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो हिन्दी से गहरा प्रेम करते हैं, हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अवश्य उत्सुक होंगे।


सभा की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने संसार के समस्त हिन्दी-भाषियों और हिन्दी-प्रेमियों को बधाई दी और कहा कि हिन्दी शीघ्र ही भारत की 'राष्ट्रभाषा' घोषित होगी। संपूर्ण भारतवर्ष अब यह समझ चुका है कि अंग्रेज़ी के माध्यम से आज तक हमें ठगा गया है और अपनों से दूर किया गया है। हिन्दी हमारी एकता को दृढ़ और अंग्रेज़ी खंडित करती है। भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र और विश्वगुरु के रूप में स्थापित होना है, तो उसे देश को आत्मा से गले लगाने वाली भाषा हिन्दी को 'राष्ट्रभाषा' का स्थान देना ही होगा। देश का एक राष्ट्रीय-ध्वज है, एक राष्ट्रीय चिन्ह है, यहाँ तक कि राष्ट्रीय-पशु-पक्षी तक भी है। केवल एक 'राष्ट्र-भाषा' ही नहीं है, जिसके अभाव में एक राष्ट्र 'गुंगा' ही रहता है, भले ही वह बाहर से कितना भी समृद्ध क्यों नहीं जान पड़े।

भारत सरकार की हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव, सुप्रसिद्ध लेखिका किरण सिंह, प्रो जनार्दन सिंह, डा रत्नेश्वर सिंह, डा पूनम आनन्द, प्रो उषा सिंह, विभा रानी श्रीवास्तव तथा अरविन्द कुमार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर १४ साहित्यकारों, अलीगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार डा दिनेश कुमार शर्मा (अलीगढ़), डा सुरेश चंद्र 'सरस' (कटिहार), रामनरेश ठाकुर 'रतनपुरी' (मुज़फ़्फ़रपुर), डा जवाहर लाल देव (कटिहार), सुरेश चंद्र झा (जमशेदपुर), डा कुमारी मनीषा (छपरा), डा सोमवती शर्मा(कासगंज, उ प्र), मीरा प्रकाश (पटना), डा आशा रघुदेव (पटना), माधवी उपाध्याय (जमशेदपुर), ईं राजेश कुमार पाण्डेय (पटना), सहदेव मिश्र (कटिहार) तथा निवेदिता श्रीवास्तव (लखनऊ), डा दीपिका त्रिपाठी (लखनऊ) को 'पद्मश्री डा शैलेंद्रनाथ श्रीवास्तव हिन्दी-सेवी सम्मान' से विभूषित किया गया।


अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के पुस्तकालय मंत्री ईं अशोक कुमार ने, मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ कवि प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, डा दिनेश दिवाकर, चंदा मिश्र, बाँके बिहारी साव, डा विद्या चौधरी, पं उमेश मिश्र, शमा कौसर 'शमा', सिद्धेश्वर, तनुजा सिन्हा, डा मनोज गोवर्धनपुरी, डा मुकेश कुमार ओझा, चित्तरंजन लाल भारती, डा इंदु पाण्डेय, इन्दुभूषण सहाय, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, प्रवीर पंकज, भास्कर त्रिपाठी, बिंदेश्वर प्रसाद गुप्ता, इरफ़ान अहमद बेलहारवी, डा सैयद हुमायूँ अख़्तर आदि प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
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