विधिक सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने की दिशा में बिहार सरकार का बड़ा जोर
- विधि मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’ ने की विभागीय कार्यों की समीक्षा, लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन और न्यायिक आधारभूत संरचना को गति देने के निर्देश
पटना। बिहार सरकार के विधि विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनसुलभ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन, विधि पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी, अधिवक्ता कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा न्यायिक आधारभूत संरचना से जुड़े निर्माण कार्यों को गति देने पर विशेष जोर दिया है। विधि मंत्री श्री संजय सिंह ‘टाइगर’ की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में विभाग के विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा लंबित एवं प्रक्रियाधीन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
बैठक में विभाग की विभिन्न शाखाओं से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई। इसके साथ ही वर्तमान राज्य सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत की गई 100 दिवसीय प्रगति रिपोर्ट में शामिल कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन मामलों में प्रक्रिया किसी स्तर पर लंबित है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और निर्धारित समय-सीमा में उनके निष्पादन की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में विधि पदाधिकारियों के कार्य-मूल्यांकन से लेकर न्यायालयों में उनकी नियुक्ति, वचनबद्ध विधि पदाधिकारियों के पारिश्रमिक में एकरूपता, अभियोजन की स्वीकृति, विधिक्षा एवं वैधानिक परामर्श, अधिवक्ता कल्याण तथा न्यायिक आधारभूत संरचना से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विधि पदाधिकारियों के कार्य-मूल्यांकन में तेजी के निर्देश
बैठक में बिहार विधि पदाधिकारी (वचनबद्धता) नियमावली, 2023 के नियम-10 एवं 11 के तहत विधि पदाधिकारियों के कार्य-मूल्यांकन से संबंधित मामलों की समीक्षा की गई। विभाग की ओर से प्राप्त जानकारी के आधार पर उन स्थानों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां से अभी तक संबंधित विधि पदाधिकारियों के कार्य-मूल्यांकन प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
विधि मंत्री ने ऐसे सभी लंबित कार्य-मूल्यांकन प्रतिवेदनों को शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। सरकार की ओर से विधि पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली का नियमित मूल्यांकन किए जाने को प्रशासनिक दक्षता तथा सरकारी मुकदमों की प्रभावी पैरवी की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में सरकारी विभागों, सहायता प्राप्त बोर्ड एवं निगमों तथा संवैधानिक और वैधानिक संस्थाओं में सरकार का पक्ष रखने वाले वचनबद्ध विधि पदाधिकारियों के पारिश्रमिक निर्धारण में एकरूपता लाने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके लिए आवश्यक नीति-निर्णय का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया। इससे अलग-अलग संस्थानों अथवा विभागों में समान प्रकृति के कार्य करने वाले विधि पदाधिकारियों के पारिश्रमिक को लेकर एक समान नीति तैयार करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
विभिन्न न्यायालयों में विधि पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया होगी तेज
सरकार के मुकदमों की प्रभावी पैरवी के लिए न्यायालयों में पर्याप्त संख्या में सक्षम विधि पदाधिकारियों की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में गंभीरता से समीक्षा की गई। जिला न्यायमंडल, उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय के लिए विभिन्न श्रेणियों के विधि पदाधिकारियों की प्रक्रियाधीन नियुक्तियों की स्थिति की जानकारी ली गई।
इन नियुक्तियों में सरकारी वकील, सहायक सरकारी वकील, लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक तथा विशेष लोक अभियोजक सहित अन्य श्रेणियों के विधि पदाधिकारियों की नियुक्तियां शामिल हैं। बैठक में शेष जिलों में लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को गति देने के निर्देश दिए गए, ताकि न्यायालयों में सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न रहे।
विधि विभाग की कार्यक्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सरकारी मुकदमों की प्रभावी पैरवी से जुड़ा है। ऐसे में नियुक्तियों की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर दिया गया जोर न्यायिक मामलों के बेहतर संचालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभियोजन स्वीकृति और वैधानिक परामर्श के मामलों में भी तेजी
बैठक में अभियोजन की स्वीकृति अथवा अस्वीकृति से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। ऐसे मामलों में प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर होने वाली देरी को कम करने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से विधिक्षा अथवा वैधानिक परामर्श के लिए विधि विभाग को भेजी गई संचिकाओं की स्थिति की भी जानकारी ली गई। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में चार संचिकाएं प्रक्रियाधीन हैं। इन सभी मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
विधि विभाग द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों को दिए जाने वाले वैधानिक परामर्श का सीधा संबंध सरकारी निर्णयों की कानूनी वैधता और प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन से होता है। इसलिए इन मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने के निर्देश को विभागीय कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिवक्ता कल्याण योजना के लिए ₹30 करोड़ की राशि विमुक्त
बैठक में अधिवक्ताओं और अधिवक्ता संघों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस दौरान जानकारी दी गई कि अधिवक्ता कल्याण योजना के लिए ₹30 करोड़ की राशि विमुक्त की गई है।
अधिवक्ता समुदाय के कल्याण से जुड़े विषयों को बैठक में विशेष महत्व दिया गया। अधिवक्ताओं को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न चिकित्सा सहायता योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने तथा उनके लिए ई-लाइब्रेरी की सुविधा विकसित करने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में अधिवक्ता कल्याण योजना को ध्यान में रखते हुए स्टाम्प शुल्क को ₹25 से बढ़ाकर ₹50 किए जाने की जानकारी भी दी गई। अधिवक्ताओं के सामाजिक एवं आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार को इस समीक्षा बैठक का महत्वपूर्ण पक्ष माना गया।
न्यायिक आधारभूत संरचना के लंबित निर्माण कार्यों को मिलेगी गति
न्यायालयों के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना के विकास और लंबित निर्माण कार्यों को पूरा करने पर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। विभिन्न न्यायमंडलों में चल रहे सिविल एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। ऐसे लंबित कार्यों को राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि से पूरा कराने की दिशा में कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
इसके साथ ही आवश्यक प्रस्ताव आगामी मंत्रिमंडल के समक्ष रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को भी कहा गया। इसका उद्देश्य न्यायालयों से संबंधित लंबित निर्माण कार्यों को वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण लंबे समय तक बाधित होने से बचाना है।
न्यायिक आधारभूत संरचना में न्यायालय भवन, आवश्यक सुविधाएं तथा न्यायिक कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण शामिल है। इन कार्यों के समय पर पूरा होने से न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
महिला अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए Pink Toilet निर्माण पर जोर
बैठक में महिला अधिवक्ताओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार को भी महत्व दिया गया। महिला अधिवक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए न्यायालय परिसरों में Pink Toilet के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
इसके लिए भवन निर्माण विभाग से आवश्यक मॉडल, अनुमानित लागत तथा अन्य तकनीकी विवरण प्राप्त करने को कहा गया है। न्यायालय परिसरों में महिलाओं के लिए बेहतर एवं सुरक्षित सुविधाओं की उपलब्धता को न्यायिक कार्यस्थल को अधिक सुविधाजनक और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यान्वयन पर विशेष बल
बैठक के दौरान सरकारी योजनाओं एवं विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्र निर्धारित समय पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
विधि मंत्री ने विभागीय कार्यों की नियमित निगरानी, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों के क्रियान्वयन को आवश्यक बताया। उन्होंने लंबित एवं प्रक्रियाधीन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से निष्पादित करने पर बल दिया।
समीक्षा बैठक में सामने आए निर्देशों से स्पष्ट है कि विधि विभाग अब केवल लंबित प्रशासनिक एवं कानूनी मामलों के निपटारे तक सीमित न रहकर विधिक सेवाओं की गुणवत्ता, अधिवक्ता कल्याण, न्यायालयों में मानव संसाधन की उपलब्धता और न्यायिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में समन्वित प्रयास पर जोर दे रहा है।
विधि मंत्री श्री संजय सिंह ‘टाइगर’ ने विभागीय कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि लंबित एवं प्रक्रियाधीन मामलों का शीघ्र निष्पादन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित निगरानी के साथ-साथ बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने और कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का निर्देश दिया।बैठक में दिए गए निर्देशों का व्यापक उद्देश्य राज्य में विधिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, उत्तरदायी और सुगम बनाना है। नियुक्ति प्रक्रियाओं में तेजी, विधि पदाधिकारियों के कार्य-मूल्यांकन की व्यवस्था, पारिश्रमिक में एकरूपता, अभियोजन संबंधी मामलों का त्वरित निष्पादन, अधिवक्ता कल्याण के लिए वित्तीय प्रावधान तथा न्यायालयों की आधारभूत सुविधाओं के विकास जैसे कदमों से बिहार की न्यायिक एवं विधिक प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है।
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