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सात दिन भागवत सुनकर अपनी आत्मा को परमात्मा में लीन कर लिए राजा परीक्षित - आचार्य त्रिपुष्कर शास्त्री

सात दिन भागवत सुनकर अपनी आत्मा को परमात्मा में लीन कर लिए राजा परीक्षित - आचार्य त्रिपुष्कर शास्त्री

  • द्वारका मन्दिर में श्रीमदभागवत कथा का सातवाँ दिन
द्वारका मंदिर, आनन्द पुरी, बोरिंग केनाल रोड में आयोजित श्रीमद्‌भागवत कथा के सातवें दिन पूर्वाहन से यजमान सुनील कुमार तिवारी ने सपलीक कथाविहित पूजन किया।
अपराहण में कथा व्यास आचार्य श्री त्रिपुष्कर शास्त्री जी महाराज का व्यासपूजन यजमान ने सपरिवार किया l सातवें दिन की कथा प्रसंग में आचार्य जी ने श्रीकृष्ण के अन्य विवाहों की कथा सहित राजा परीक्षित को मोक्ष का वर्णन कर श्रोताओं में उस भागवत भक्ति का भाव जगाया। आचार्यश्री ने कहा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रीमदभागवत की कथा सुनकर जीवन मुक्ति के रहस्य को जान लिया। स्वार्थ और परमार्थ का फलाफल जान चुके राजा परीक्षित व्यास शुकदेव जी के चरणो में नतमस्तक होकर के कहने लगे - आपने-भागवत सुनाकर ब्रह्म और आत्मा की एकता का रहस्य बता दिया। अब मुझे तक्षक आदि किसी भी मृत्यु के निमित्त से मुझे कोई भय नहीं है। ऐसे कई प्रकार से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए राजा परीक्षित ने शुकदेव जी की पूजा स्तुति की। राजा परीक्षित अपने अन्तरात्मा को परमात्मा के चिन्तन में लीन कर लिया। ध्यान मग्न राजा परीक्षित को समाधि लग गयी, उनकी साँसे भी थम गई l उसी अवस्था में ब्राह्मण का वेश धारण कर तक्षक आया और इनके पास आकर इन्हें डस लिया। किन्तु उसका शरीर त्याग पहले ही हो चुका है। तक्षक के विष से जो अग्नि प्रगट हुई उसमें राजा परीक्षित का समाधिस्थ शरीर भस्म हुआ l तक्षक के डसने से नहीं मरे राजा अपने आत्मा जो परमात्मा में मिलाकर इहलोकी शरीर का त्याग किया l
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