द्वारका मन्दिर में नौ दीवसीय श्रीमदभागवत कथा आरंभ

- सिया बिहारी कुंज ठाकुरबाड़ी से निकाली गयी श्रीमदभागवत कलश शोभा यात्रा
- जीवन को सार्थक बनाने के लिए विवेक. बुद्धि जगाती है. श्रीमदभागवत कथा -. श्री त्रिपुष्कर जी महाराज
द्वारका मंदिर, आनन्दपुरी, बोरिग केनाल रोड में आज 1 से 9 सितम्बर तक आयोगित श्रीमद्भागवत कथा संगीतमय प्रवचन के प्रथम दिन प्रातः काल श्री सियाबिहारी कुंज ठाकुरबाड़ी राजापुर से श्रीमदभागवत एवं कलश की शोभायात्रा निकाली गयी l श्रीधाम वृन्दावान के कथाव्यास
श्री त्रिपुष्कर जी महाराज ने कथा के यजमान सुनील कुमार तिवारी सहित ठाकुरबाड़ी के गर्भगृह में श्रीराम जानकी लक्ष्मण की सहित हनुमान की पूजा अर्चना की l कथाव्यास सहित ठाकुरबाड़ी के महंथ श्री नागेंद्र दास द्वारका मन्दिर के मुख्य पुजारी पं मुकेश पाठक रथ पर बिराजे l सिर पर श्रीमदभागवत लिए याजमान चले, पीछे कलश लिए महिला श्रद्धालुओं का काफिला निकला l बैंड बाजा के साथ कलश यात्रा द्वारका मन्दिर पहुँचा l कलश को कथा स्थल पर स्थापित किया गया l कलश यात्रा की अगुआई की नीरज कुमार, विश्व हिन्दू परिषद के अनिल पाण्डेय, सुरेंद्र यादव, मणिकांत दूबे, आयोजक लाला भगत, भोला सिंह, ब्रजेश जी, अनुराधा कुमारी, गुड़िया कुमारी, प्रमिता कुमारी ने l
कलश यात्रा पश्चात् कथा स्थल पर गौड़ी, गणेश, वरुण नवग्रह, सर्वतोभद्र, शोडशमातृका, सप्तवृत्त मातृका, क्षेत्रपाल, चौसठ योगिनी, हनुमान, शुकदेव, श्रीमदभागवत का पूजन यजमान सुनील कुमार तिवारी ने किया l पूजा के. साथ ही वाराणसी से आमंत्रित पुरोहित श्री रुद्राक्ष शास्त्री द्वारा श्रीमदभागवत महापुराण का परायण आरंभ हुआ जो नौ दिनों में. संपन्न होगा l
अपराहण में व्यासपीठपर कथावाचक श्री त्रिपुष्कर जी महाराज का व्यासपूजन यजमान सहित अन्य. श्रद्धालुओं ने. किया l.jpeg)
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कथा का प्रयोजन व्यक्त. करते हुए. सुनील कुमार. तिवारी ने कहा भगवान में प्रेम भाव से ही श्रीमदभागवत की कथा.प्रगट हुई इहलोक में। हमारे बुद्धि, विवेक लिए भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की भूमिका क्या है? श्रीमद्भागवत की कथा हमें बताती है l यह कथा सबके लिए समान रूप से उपयोगी है जो सबके जीवन में कल्याणकारी चेतना जगाती है और सभी एक साथ नारा लगाते हैं धर्म की जय हो l अधर्म का नाश हो l प्राणियों में सद्भावना हो l विश्व का कल्याण हो l
श्रीमद्भागवत कथा का मंगलाचरण करते हुए त्रिपुष्कर जी महाराज ने कहा श्रीमद्भागवत देवदुर्लभ कथा है जो मनुष्य को इहलोक में सुलभ हुआ है। श्रीमदभागवत वह विवेक बुद्धि जगाती है, बढ़ाती है जो इस मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए आवश्यक हैं। जीवन में निश्चित संकल्पित ध्येय पूर्ति के लिए जिस भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की आवश्यकता होती है। वह श्रीमद्भागवत की कथा सुनकर प्राप्त हो जाती है।जो सांसारिक माया के वश में काम, क्रोध, लोभ आदि विकारों से ग्रसित होकर दुःख में पड़े हुए हैं उनमे श्रीमदभागवत की कथा नव चेतना का संचार करता है और भगवान की भक्ति के प्रति आस्थावान बनाती है। भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की कथा सुनाते हुए महाराज जी ने कहा प्रत्येक मनुष्य के जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का होना जरूरी है। जीवन में सफल होने के लिए यह परम आवश्यक है। सच्चिदानंद स्वरुप भगवान श्री कृष्ण की भक्ति से दैहिक, दैविक भौतिक तीनों तापों से मुक्ति मिल जाती है l कथा प्रसंग के अनुरूप भजनों को. सुनकर भाव विभोर होते रहे श्रद्धालु l
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