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28 सितंबर को राजभवन मार्च के समर्थन में उतरेगी भाकपा, 1 से 3 दिसंबर तक देशव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान

28 सितंबर को राजभवन मार्च के समर्थन में उतरेगी भाकपा, 1 से 3 दिसंबर तक देशव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान

  • बाढ़-सूखा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग; महंगाई, बेरोजगारी, अपराध, भ्रष्टाचार और बुलडोजर नीति के खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय

पटना, 12 सितंबर 2026। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) बिहार राज्य परिषद की शनिवार को जनशक्ति भवन, पटना में आयोजित बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन को और व्यापक एवं तेज करने का निर्णय लिया गया। बैठक में विभिन्न जनसंगठनों के आह्वान पर 28 सितंबर 2026 को शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर पटना में प्रस्तावित आक्रोशपूर्ण राजभवन मार्च को पार्टी की ओर से पुरजोर समर्थन देने की घोषणा की गई। इसके साथ ही 1, 2 और 3 दिसंबर 2026 को ‘बदलाव जरूरी है’ के नारे के साथ देशव्यापी जेल भरो आंदोलन चलाने का फैसला लिया गया।

बैठक में बिहार में आई बाढ़ और सूखे की समस्या पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई। पार्टी ने बाढ़-सूखा की समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डा. गिरीश चंद्र शर्मा ने कहा कि देश गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है और आम जनता महंगाई की मार झेल रही है। उन्होंने कहा कि आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं तथा डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

उन्होंने केंद्र की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि देश के सामने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं। उन्होंने घोषणा की कि भाकपा 7 नवंबर को ‘क्रांति दिवस’ के रूप में मनाएगी। इस अवसर पर दुनिया भर के मुक्ति संघर्षों और क्रांतिकारी आंदोलनों में कम्युनिस्टों की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया जाएगा। साथ ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम और लोकतांत्रिक परिवर्तन में कम्युनिस्ट आंदोलन के योगदान को भी जनता के बीच रखने का प्रयास किया जाएगा।

डा. शर्मा ने कहा कि विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच कम्युनिस्ट आंदोलन की कथित क्रांतिकारी और लोकतांत्रिक विरासत को पहुंचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में व्यापक राजनीतिक और नीतिगत बदलाव की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से भाकपा ने 1 से 3 दिसंबर तक देशव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ चलाने का निर्णय लिया है। पार्टी ने इस आंदोलन के तहत देशभर में कम से कम पांच लाख कामरेडों को गिरफ्तारी देने के लिए लामबंद करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्होंने कहा कि आंदोलन में मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया जाएगा तथा बुनियादी राजनीतिक एवं नीतिगत बदलाव की मांग को मजबूती दी जाएगी।

‘बुलडोजर नीति’ और अपराध के मुद्दे पर सरकार को घेरा


भाकपा के बिहार राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने बैठक को संबोधित करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था, कथित मॉब लिंचिंग, एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में असहमति की आवाज को दबाने तथा गरीब, भूमिहीन और कमजोर वर्गों के हितों की अनदेखी करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

उन्होंने सेटेलाइट टाउनशिप योजना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इसके कारण बिहार के 11 जिलों की लगभग दो लाख एकड़ जमीन को लेकर किसानों और ग्रामीणों के बीच चिंता उत्पन्न हुई है। उन्होंने सरकार से इस मामले में प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा करने की मांग की।

रामनरेश पाण्डेय ने महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार और कृषि संकट को भी प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि डीजल-पेट्रोल तथा रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ रहा है। वहीं, बेरोजगारी और पलायन के कारण बड़ी संख्या में युवा परेशान हैं और कृषि क्षेत्र भी संकट से जूझ रहा है।

उन्होंने मनरेगा को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि ग्रामीण गरीबों और दलित परिवारों के सामने रोजगार तथा न्यूनतम मजदूरी का संकट गहराता जा रहा है। आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशाकर्मी, रसोइया, निर्माण कामगार, वित्त रहित कर्मी सहित विभिन्न योजना एवं संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग को भी उन्होंने आंदोलन का महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

श्रम संहिताओं और शिक्षा के मुद्दे पर भी भाकपा मुखर


राज्य सचिव ने चार श्रम संहिताओं को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इनके माध्यम से मजदूरों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने शिक्षा के बाजारीकरण तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

महिला उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं तथा महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मजदूर, किसान, छात्र, युवा, महिलाएं और समाज के अन्य वंचित वर्ग अपने-अपने सवालों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में संयुक्त संघर्ष और आंदोलन को व्यापक बनाना समय की राजनीतिक आवश्यकता है।

28 सितंबर के राजभवन मार्च को भाकपा का समर्थन


बैठक में निर्णय लिया गया कि किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन, ट्रेड यूनियन, बिहार महिला समाज, यूथ फेडरेशन, स्टूडेन्ट्स फेडरेशन, तंजीम-ए-इंसाफ सहित विभिन्न जनसंगठनों द्वारा 28 सितंबर को पटना में आयोजित संयुक्त राजभवन मार्च को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी पूर्ण समर्थन देगी।

पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया। भाकपा ने कहा कि जनसमस्याओं को लेकर विभिन्न संगठनों के संयुक्त आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा।

बैठक में 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर सांप्रदायिक सद्भाव दिवस के रूप में मनाने तथा 7 नवंबर को क्रांति दिवस आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। इसके बाद दिसंबर में तीन दिवसीय जेल भरो आंदोलन के जरिए सरकार की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाने की रणनीति तय की गई।

बैठक को राज्य सचिवमंडल के सदस्य सुरेन्द्र सौरभ, रामचन्द्र महतो, गजनफर नबाब, जानकी पासवान तथा बिहार महिला समाज की महासचिव राजश्री किरण सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया। बैठक की अध्यक्षता ओमप्रकाश नारायण और प्रभाशंकर सिंह की अध्यक्षमंडली ने की।इस प्रकार भाकपा ने बिहार में 28 सितंबर के राजभवन मार्च से लेकर दिसंबर के देशव्यापी जेल भरो आंदोलन तक आंदोलन की एक विस्तृत रूपरेखा तैयार कर दी है। अब निगाहें 28 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर हैं, जहां विभिन्न जनसंगठनों के साझा मंच से सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद किए जाने की तैयारी है।

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