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"विखंडन से पुनर्निर्माण"

"विखंडन से पुनर्निर्माण"

पंकज शर्मा
जीवन सदैव हमारी इच्छाओं के अनुरूप नहीं चलता। कभी परिस्थितियाँ हमें भीतर तक झकझोर देती हैं, विश्वासों को तोड़ती हैं और अस्तित्व को विखंडित कर देती हैं। ऐसे क्षणों में पराजय अंतिम सत्य प्रतीत होती है, किंतु वास्तव में वही अंधकार हमारे भीतर छिपी जिजीविषा का परीक्षण करता है। टूटना अंत नहीं, बल्कि स्वयं को नए सिरे से देखने का अवसर है।

मित्रों जब सब कुछ बिखरता हुआ प्रतीत हो, तब आशा का सूक्ष्म प्रकाश ही भीतर लौटने का मार्ग दिखाता है। आवश्यकता केवल इतनी है कि हम अपने टूटे हुए अंशों को दुर्बलता नहीं, अनुभव समझकर स्वीकार करें। जीवन हमें वही वापस नहीं देता जो खो गया, किंतु उससे अधिक मूल्यवान—एक नया दृष्टिकोण, नया संकल्प एवं स्वयं को पुनः गढ़ने की शक्ति—अवश्य प्रदान कर सकता है।

. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) 
 पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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